माँ

🌹  *माँ*🌹

शब्द तुम,शब्दों की माल तुम
गीत तुम, गीतों का गुंजार तुम
सुर तुम, सुरो का ताल तुम
दिल तुम, दिल की धडकन तुम
मन तुम, मन का मीत तुम
खुशियों की फुहार तुम
रौशनी का त्यौहार तुम
जीत तुम, जीत का एहसास तुम
हर घड़ी हर पल जीवंतता का एहसास तुम
स्नेह का कल-कल निश्चल झरणा तुम
वात्सल्य  सुधा सरगम तुम
आत्मविश्वास का धमधमता धोध तुम
शांत रस सरिता तुम
कवि की कविता मे तुम
पूजा तुम अर्चना मे तुम
अपनो मे प्रेम की वजह तुम
हर घड़ी हर पल मेरे होने का
एहसास तुम
कितना भी लिखू  *माँ*
तुम्हारे लिए हर शब्द कम
सच तो ये है कि  *संगी*
के होने की वजह तुम
*हे माँ* ! तु है तो मैं हूँ
मेरा वजूद तुम

         🌹 *संगी*🌹

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