*जागो सोचो समझो और फिर वोट करो*

*वर्तमान में कैसे हो धार्मिक  वहीवट सम्भालने वाले व्यक्तित्व⁉⁉*

*🔻जब भी सामाजिक,धार्मिक वहीवट के ट्रस्ट मंडलो की कार्यकारिणी निकाय के चुनाव होते हे तब तब सिलेक्शन या इलेक्शन होता है ।*
*🔻और हम मतदाता वोट देकर खानापूर्ति कर देते है और बाद में  लकीर पिटते है ये ट्रस्टी सही नहीं वो अच्छा नहीं ..तो हम गलती कहा करते है या तो हम सही के चुनाव करने में सक्षम नही है या फिर हम अपने नीजी स्वार्थों  को ज्यादा तव्वजों देते है। या फिर हम किसी की हां में हां मिला रहे होते है।*

*कहते है घर सोसायटी समाज सस्था या देश कही पर भी वहीवट या नैतृत्व करने वाले अगर सही ना हो तो टूटते बिखरते देर नही लगती और ना ही प्रगति के कोई सोपान चढ़ पाते।*

*हम हमारे समाज से ही इन व्यक्तियों को चुनतेे है जो हमारी धार्मिक सामाजिक संस्थाओं के वहीवट सम्भालते है। और इसलिए भी ये हमारा नैतिक दायित्व हो जाता है कि हम सही व्यक्तित्वो को चुनें।*

*तो प्रश्न ये आता है कि वे व्यक्ति  कौन हो ...........तो इसका सीधा सादा उत्तर ये है कि जिस प्रकार किसी भी कंपनी मे जाॅब हेतू अमूक पदो के लिए अमूक योग्यताए निर्धारित होती है ठिक इसी प्रकार हमारे धार्मिक  सामाजिक वहीवट सम्भालने वालों के लिए कुछ मापदण्ड योग्यताए निर्धारित की जाए।*

*उपर्युक्त विषय पर मेनें समाज के काफी गणमान्य व्यक्तियों से बात की और सर्व साधारण के सर्वेक्षण से जो कुछ भी राय बनी उसको आप सभी के समक्ष प्रस्तुत कर रही हूँ।*

*🔻जिनाज्ञा मानने वाला, गुरू आज्ञानुसार चलने वाला  शासन समर्पित नीतिवान व्यक्तित्व का मालिक हो*

*🔻 धर्म के मर्म को समझे यानि की हमारे शास्त्रों के ज्ञाता हो।*

*🔻पढ़े लिखे सज्जन हो*

*🔻चरित्र से भी साफ सुथरे हो* *(नहीं तो बाद मे ही पता चलता है नाम बड़े और दर्शन खोटे)*

*🔻देवद्रव्य या और भी किसी भी प्रकार के द्रव्य का रक्षक हो ना कि भक्षक।* *(बाद में पता चलता है संस्था के कर्मचारी और पैसा दोनो व्यक्तिगत  उपयोग में आ रहै है)*

*🔻निस्वार्थ भाव से अपनी सेवाएँ दे सकें।*

*🔻जरूरत पड़ने पर स्व द्रव्य का उपयोग भी करें ऐसे सक्षम हो हमारे ट्रस्टी महोदय।*

*🔻कुशल नैतृत्व् व वक्ता के गुण हो ।*

*🔻अपनी सही बात को दृढ़ता से दूसरो के समक्ष रख सकें ।*

*🙏आप सभी सोचे समझे मनन करे और फिर ही किसी भी ट्रष्ट मंडल के चुनाव हो या धार्मिक सामाजिक वहीवट के चुनाव आप सभी निर्णय लेने में सक्षम है ।*
*🙏किसी की हां में हां मिलाकर चापलूसी करने के बजाय अपने नीजी स्वार्थों से ऊपर ऊठ कर सोचने का समय है।*

*🙏किसी भी समाज, सोसायटी, धर्म की प्रगति हमारे कुशल नैतृत्व एवं आपसी एकता पर निर्भर है।*

*जिनाज्ञा विरूध्द कुछ भी लिखा हो तो मिच्छामी दुक्कडम*

*🙏🙏संगीता बागरेचा(संगी)🙏🙏*

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