मै पुरूष हूँ ...........
*🌹मै पुरूष हूँ।🌹*
*प्यार का एहसास है*
*मन में कोमल भाव है*
*मै पुरूष हूँ भावनाएँ*
*व्यक्त करना नही आता है।*
*बेटा-भाई मामा-चाचा*
*ताऊ पति-पिता भी हूँ*
*जिम्मेदारियो के बोझ तले*
*दबा मन बडा घबराता है*
*मै पुरूष हूँ .........*
*विचार कई आते जाते मन मे*
*चेहरे से मगर दिखा नहीं पाता हूँ*
*विश्व पटल पर चकडोल सा*
*डोलता झूलता नजर आता हूँ*
*मै पुरूष हूँ ..........*
*माता-पिता की उम्मीदों पर*
*कभी खरा नही उतर पाता हूँ*
*तो बुरा लगता है पर नहीं*
*जता-बता पाता हूँ ।*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*पत्नी को भी होती होगी*
*सहारे की मेरी जरूरत*
*बुरा लगता है जब*
*सहारा नहीं दे पाता हूँ ।*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*बच्चे भी तो चाहते होंगे*
*खेलना पढना और घूमना*
*पर समय नहीं दे पाता तब*
*स्व को मजबूर बहुत पाता हूँ*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*माँ-पत्नी की महाभारत में*
*खुद को उलझा पाता हूँ*
*पक्ष किसी का नही ले पाता*
*बेबस-लाचार स्व को पाता हूँ*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*बिमार हो कोई भी बच्चे बुढे*
*ठिक होने तक दिमाग वहीं दौडाता हूँ*
*शिकन चिंता की फिर भी*
*किसी को नही दिखाता हूँ*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*रोजमर्रा की हजारों परेशानियाँ*
*सामना करता स्वं को बैचेन पाता हूँ*
*संगी* *-साथी होते हुए भी*
*स्वयं को अकेला पाता हूँ*
*क्योंकि मै पुरूष हूँ भावनाएँ*
*व्यक्त करना नही आता है*
*क्योंकि मै पुरूष हूँ भावनाएँ*
*व्यक्त करना नही आता है*
*🌹संगीता बागरेचा🌹*
*प्यार का एहसास है*
*मन में कोमल भाव है*
*मै पुरूष हूँ भावनाएँ*
*व्यक्त करना नही आता है।*
*बेटा-भाई मामा-चाचा*
*ताऊ पति-पिता भी हूँ*
*जिम्मेदारियो के बोझ तले*
*दबा मन बडा घबराता है*
*मै पुरूष हूँ .........*
*विचार कई आते जाते मन मे*
*चेहरे से मगर दिखा नहीं पाता हूँ*
*विश्व पटल पर चकडोल सा*
*डोलता झूलता नजर आता हूँ*
*मै पुरूष हूँ ..........*
*माता-पिता की उम्मीदों पर*
*कभी खरा नही उतर पाता हूँ*
*तो बुरा लगता है पर नहीं*
*जता-बता पाता हूँ ।*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*पत्नी को भी होती होगी*
*सहारे की मेरी जरूरत*
*बुरा लगता है जब*
*सहारा नहीं दे पाता हूँ ।*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*बच्चे भी तो चाहते होंगे*
*खेलना पढना और घूमना*
*पर समय नहीं दे पाता तब*
*स्व को मजबूर बहुत पाता हूँ*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*माँ-पत्नी की महाभारत में*
*खुद को उलझा पाता हूँ*
*पक्ष किसी का नही ले पाता*
*बेबस-लाचार स्व को पाता हूँ*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*बिमार हो कोई भी बच्चे बुढे*
*ठिक होने तक दिमाग वहीं दौडाता हूँ*
*शिकन चिंता की फिर भी*
*किसी को नही दिखाता हूँ*
*मैं पुरूष हूँ ....*
*रोजमर्रा की हजारों परेशानियाँ*
*सामना करता स्वं को बैचेन पाता हूँ*
*संगी* *-साथी होते हुए भी*
*स्वयं को अकेला पाता हूँ*
*क्योंकि मै पुरूष हूँ भावनाएँ*
*व्यक्त करना नही आता है*
*क्योंकि मै पुरूष हूँ भावनाएँ*
*व्यक्त करना नही आता है*
*🌹संगीता बागरेचा🌹*

Comments
Post a Comment