अगर मुझे संयम मिलता.......
*||श्री नाकोड़ाजी ||*
*अगर मुझे संयम मिलता तो.........🙏*
*♻संसार से मुक्त होने का भाव है संयम,*
*♻कषायों को निश्चय पूर्वक रोकना है संयम।*
*♻संसार से मुक्त होने का भाव है संयम ।*
*♻सिद्ध स्वरूप पाने का शाश्वत मार्ग है संयम।*
♻हम कई बार सोचते है अरे ऐसा होता तो ये होता वैसा होता तो ये होता कहने का तात्पर्य है कि मानव मन चंचल होता है और हर समय कुछ ना कुछ सोचता रहता है इसी प्रकार सोचते सोचते ये ख्याल आया कि अगर मुझे संयम मिलता तो .......
कैसा होता?
क्या होता?
और मै क्या करती....?
यही सब विचार मै आपके समक्ष रखने जा रही हूँ?
*♻सर्व प्रथम तो संयम है क्या है ये जानते है वैसे तो संयम शब्द ही अपने आप में व्यापक अर्थ लिए हुए है लेकिन हम इसे कम से कम शब्दों में समझने की कोशिश करेंगे ।*
*♻ज्ञानी गुरूभगवंत फरमाते है कि,*
*संयम का अर्थ है एक सशक्त सहारे के साथ हल्का सा बंधन ।*
*यह बंधन निर्बंध करता है ।*
*आज तो हम बिना ब्रेक की गाड़ी में नीचे जाते हुये भी आँखें मींचे हुये बैठे हैं ।*
*क्या ब्रेक रूपी संयम के बिना जीवन की गाड़ी सुरक्षित रह पायेगी ?*
*बिल्कुल नही रह सकती.....*
*👉संयम दो प्रकार का है –*
*1. इंद्रियों (पाँच इंद्रिय + मन) पर नियंत्रण ।(संयम अर्थात दीक्षा सन्यास इत्यादि के बाद )*
*2. प्राणियों (वनस्पतिकायिक आदि पाँच प्रकार तथा त्रस – जानवर, मनुष्य आदि) की रक्षा ।*
*दूसरा वाला मनुष्य पर्याय के लिये ये बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि नारकी और देवों में ये हो ही नहीं सकता तथा त्रियंचों (जानवर) में थोड़ा संयम थोड़ा असंयम ही हो सकता है ।*
*पूर्ण संयम तो मनुष्य पर्याय में ही संभव है,*
*और मनुष्य पर्याय असंख्यात बार नरक और स्वर्ग में जन्म लेने के बाद मिलती है ।*
*♻असल में धर्म,चारित्र का ही दूसरा नाम है ।अनंतकाल से संसार का भ्रमण असंयम से ही हो रहा है ।*
*♻एक बच्चा एक वृद्ध को बाग दिखाने ले गया और जिस पेड़ पर जो फल लगा था उसका नाम बताता रहा ।*
*एक पेड़ पर फल नहीं लगे थे, वृद्ध ने जब उसका नाम पूछा तो बच्चे का जबाब था –*
*बिना फल के पेड़ का नाम (महत्व) क्या ?*
*ठिक इसी प्रकार ...*
*संयम/अनुशासन के बिना मनुष्य के जीवन का महत्व क्या ?*
*♻आज के वातावरण मे जब परिस्थितियाँ विपरीत बनी हुई है तब।मेरा ये सोचना कि काश मुझे संयम मिलता तो.......संयम मिलता नही है उसे ग्रहण करना होता है संयम को जीवन में उतारना होता है.*
*👆मेरा ये सोचना एक दम सही लगता है।*
*कदाच मै साधु जीवन में प्रवेश करने के भाव मात्र से ही संसार मे रहकर भी संयम का पालन कर सकती , जैसे :-राग-द्वैष छोड़ देती ,*
*क्रोध, मान-कषाय, कथा-विकथा लोभ लालच इत्यादि का त्याग कर दूँ तो..*
*जीव मात्र के प्रति मुझमें करूणा दया ममत्व के भाव होते..*
*उसके बाद धीरे धीरे मै पंचेन्द्रिय नियन्त्रण कर संयम पथ पर अग्रसर हो सकती .......*
*♻क्योंकि ये तो शाश्वत सत्य है कि जो आया है उसे जाना है संसार क्षणभंगुर है कर्मानुसार संसार परिभम्रण भी करना ही है*
*♻मानते है शरीर क्षणभंगुर है,*
*♻जानते है शरीर क्षणभंगुर है।*
*♻नश्वर है शरीर ,फिर भी इच्छाएं अनंत है,*
*♻इच्छाओ से अनासक्ति ही शाश्वत सुखरमण है*
*🙏इसलिए ही बार बार घडी की सूई की तरह ही मेरी सोच की सूई भी एक ही जगह रूक रही है कि मुझे संयम मिलता तो शायद मेरी मुक्ति भी संभव हो सकती ......*
*♻लेकिन मै तो संसार के भौतिक भोग विलास में लीन हूँ ।*
*♻तेरे मेरे के चक्रव्युह में फंसी? हूँ*
*♻मान-अपमान के दावानल मे झुलसी हूँ*
*♻संगी जानती है कि सिद्ध गति ही अंतिम सोपान है*
*♻और संयम मुक्ति पुरी जाने का प्रथम पडाव है*
*🙏अंततः- संयम ऐसे ही नहीं आता अनंतानुबंदी पुण्योदय से संयम के भाव आते है तो जीव ऐसे कर्म करे कि हमारे भी पुण्य मे संयम रूपी सूर्य का उदय जल्द से जल्द हो .....*
*मेरी कोशिश जारी है आप भी लेख पढ़कर चिंतन -मनन अवश्य ही करें ।*
*जिनाज्ञा विरूध्द कुछ भी लिखा हो तो मिच्छामी दुक्कडम।*
*🙏🌹संगीता बागरेचा(संगी)🌹🙏*||श्री नाकोड़ाजी ||*
*अगर मुझे संयम मिलता तो.........🙏*
*♻संसार से मुक्त होने का भाव है संयम,*
*♻कषायों को निश्चय पूर्वक रोकना है संयम।*
*♻संसार से मुक्त होने का भाव है संयम ।*
*♻सिद्ध स्वरूप पाने का शाश्वत मार्ग है संयम।*
♻हम कई बार सोचते है अरे ऐसा होता तो ये होता वैसा होता तो ये होता कहने का तात्पर्य है कि मानव मन चंचल होता है और हर समय कुछ ना कुछ सोचता रहता है इसी प्रकार सोचते सोचते ये ख्याल आया कि अगर मुझे संयम मिलता तो .......
कैसा होता?
क्या होता?
और मै क्या करती....?
यही सब विचार मै आपके समक्ष रखने जा रही हूँ?
*♻सर्व प्रथम तो संयम है क्या है ये जानते है वैसे तो संयम शब्द ही अपने आप में व्यापक अर्थ लिए हुए है लेकिन हम इसे कम से कम शब्दों में समझने की कोशिश करेंगे ।*
*♻ज्ञानी गुरूभगवंत फरमाते है कि,*
*संयम का अर्थ है एक सशक्त सहारे के साथ हल्का सा बंधन ।*
*यह बंधन निर्बंध करता है ।*
*आज तो हम बिना ब्रेक की गाड़ी में नीचे जाते हुये भी आँखें मींचे हुये बैठे हैं ।*
*क्या ब्रेक रूपी संयम के बिना जीवन की गाड़ी सुरक्षित रह पायेगी ?*
*बिल्कुल नही रह सकती.....*
*👉संयम दो प्रकार का है –*
*1. इंद्रियों (पाँच इंद्रिय + मन) पर नियंत्रण ।(संयम अर्थात दीक्षा सन्यास इत्यादि के बाद )*
*2. प्राणियों (वनस्पतिकायिक आदि पाँच प्रकार तथा त्रस – जानवर, मनुष्य आदि) की रक्षा ।*
*दूसरा वाला मनुष्य पर्याय के लिये ये बहुत महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि नारकी और देवों में ये हो ही नहीं सकता तथा त्रियंचों (जानवर) में थोड़ा संयम थोड़ा असंयम ही हो सकता है ।*
*पूर्ण संयम तो मनुष्य पर्याय में ही संभव है,*
*और मनुष्य पर्याय असंख्यात बार नरक और स्वर्ग में जन्म लेने के बाद मिलती है ।*
*♻असल में धर्म,चारित्र का ही दूसरा नाम है ।अनंतकाल से संसार का भ्रमण असंयम से ही हो रहा है ।*
*♻एक बच्चा एक वृद्ध को बाग दिखाने ले गया और जिस पेड़ पर जो फल लगा था उसका नाम बताता रहा ।*
*एक पेड़ पर फल नहीं लगे थे, वृद्ध ने जब उसका नाम पूछा तो बच्चे का जबाब था –*
*बिना फल के पेड़ का नाम (महत्व) क्या ?*
*ठिक इसी प्रकार ...*
*संयम/अनुशासन के बिना मनुष्य के जीवन का महत्व क्या ?*
*♻आज के वातावरण मे जब परिस्थितियाँ विपरीत बनी हुई है तब।मेरा ये सोचना कि काश मुझे संयम मिलता तो.......संयम मिलता नही है उसे ग्रहण करना होता है संयम को जीवन में उतारना होता है.*
*👆मेरा ये सोचना एक दम सही लगता है।*
*कदाच मै साधु जीवन में प्रवेश करने के भाव मात्र से ही संसार मे रहकर भी संयम का पालन कर सकती , जैसे :-राग-द्वैष छोड़ देती ,*
*क्रोध, मान-कषाय, कथा-विकथा लोभ लालच इत्यादि का त्याग कर दूँ तो..*
*जीव मात्र के प्रति मुझमें करूणा दया ममत्व के भाव होते..*
*उसके बाद धीरे धीरे मै पंचेन्द्रिय नियन्त्रण कर संयम पथ पर अग्रसर हो सकती .......*
*♻क्योंकि ये तो शाश्वत सत्य है कि जो आया है उसे जाना है संसार क्षणभंगुर है कर्मानुसार संसार परिभम्रण भी करना ही है*
*♻मानते है शरीर क्षणभंगुर है,*
*♻जानते है शरीर क्षणभंगुर है।*
*♻नश्वर है शरीर ,फिर भी इच्छाएं अनंत है,*
*♻इच्छाओ से अनासक्ति ही शाश्वत सुखरमण है*
*🙏इसलिए ही बार बार घडी की सूई की तरह ही मेरी सोच की सूई भी एक ही जगह रूक रही है कि मुझे संयम मिलता तो शायद मेरी मुक्ति भी संभव हो सकती ......*
*♻लेकिन मै तो संसार के भौतिक भोग विलास में लीन हूँ ।*
*♻तेरे मेरे के चक्रव्युह में फंसी? हूँ*
*♻मान-अपमान के दावानल मे झुलसी हूँ*
*♻संगी जानती है कि सिद्ध गति ही अंतिम सोपान है*
*♻और संयम मुक्ति पुरी जाने का प्रथम पडाव है*
*🙏अंततः- संयम ऐसे ही नहीं आता अनंतानुबंदी पुण्योदय से संयम के भाव आते है तो जीव ऐसे कर्म करे कि हमारे भी पुण्य मे संयम रूपी सूर्य का उदय जल्द से जल्द हो .....*
*मेरी कोशिश जारी है आप भी लेख पढ़कर चिंतन -मनन अवश्य ही करें ।*
*जिनाज्ञा विरूध्द कुछ भी लिखा हो तो मिच्छामी दुक्कडम।*
*🙏🌹संगीता बागरेचा(संगी)🌹🙏*

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