ज्ञान की आशातना विराधना से कैसे बचें? ?
*|| श्री नाकोड़ाजी ||*
*🤔सोचो,समझो और जागो....*
*ज्ञान की आशातना,विराधना से कैसे बचें⁉*
*संगी*
*♻ज्ञानावरणीय कर्म : इस कर्म के उदय मे आने से जीव के ज्ञान गुण पर एक आवरण सा छा जाता है जीव की बुद्धि,स्मृति,पढने लिखने की शक्ति ,निर्णय करने की शक्ति,निरीक्षण करने की शक्तिकुण्ठित या लुप्त प्राय हो जाती है !वह सीखना चाह कर भी सीख नही पाता और सीखा हुआ भी भूल जाता है।*
*♻ ज्ञान की आशातना करने से ज्ञानावरणीय कर्म का बंध होता है सभी जानते है। इसलिए.......*
*♻ज्ञान की जयणा करें ।*
*ज्ञान की आशातना,विराधना करने से ज्ञानावरणीय कर्म बंध होता है, जिससे हमारी आत्मा मंदबुद्धि, अज्ञानता आदि दुषणों का शिकार होती है।*
*♻ यह कर्म बंध अंततः केवलज्ञान प्रकाश की पूर्ण प्राप्ति में अंतराय रूप बनता है। इसलिये हमें ज्ञान की आशातना/विराधना से बचना चाहिये।*
*♻झूठे मुँह नही बोले।यदि बोलना आवश्यक हो तो पानी से मुँह साफ करके ही बोलना चाहिये।*
*♻पुस्तकों,अख़बार, लिखा हुआ कागज,उसके टुकड़ो पर भी पैर नही लगाएं।*
*♻यदि भूल से लग जाय तो क्षमा मांगें। घर में हो या बाहर चलते वक्त भी ध्यान रखें।*
*♻पुस्तक पढ़ते हुए, पन्ने उलटते हुए या नोट आदि गिनते समय थूक न लगायें।*
*♻कमीज,पेन्ट,साड़ी,चादर आदि कपड़ों या बूट,चप्पल आदि... अक्षर या फोटो वाले न वापरें।*
*♻लिखे,छपे या कोरे कागज जलायें नही।*
*♻अख़बार या किसी भी तरह के कागज का उपयोग सोने, खाने, बैठने या अशुचि साफ करने के लिए न वापरें, आशातना होती है।*
*♻ज्ञान के उपकरणों का तिरस्कार नहीं करें।*
*♻पुस्तकों का तकिया ना बनाए।*
*♻पंचांग,पत्रिका,अख़बारों आदि में देव-गुरु के फोटो नही छपवायें।*
*♻लोग उन्हें कचरा पेटी या रोड पर फेक देते है,इस प्रकार अज्ञानवश भयंकर आशातना के निमित्त बनते है।*
*♻रास्ते, कचरापेटी,नदी या समुद्र में नही फेकें,कागज में सूक्ष्म जीवों की संभावना रहती है।*
*♻कई पत्रिकाएँ आदि लेमिनेशन वाले होते है, ये पानी के जीवों के लिए हानिकारक बनते है,जीव मृत्यु को भी प्राप्त कर सकते है।*
*♻पूर्व में किसी भी प्रकार के ज्ञान के पेपरों को गड्डा खोदकर जयणा पूर्वक उपयोग करने का विधान है।*
*♻हर शहर या गाँव के ट्रस्ट मण्डल को यह हर महीने आराधना भवन या जैन धर्मशाला में रविवार का दिन निश्चित कर ज्ञापन लिख देना चाहिए कि आपके पास जो भी अनावश्यक पुस्तके या अख़बार आदि है, वें यहां आकर जमा करावें। (अपवाद रूप कहीं कहीं ये सुविधा है)*
*♻और वे इस इकट्ठा सामग्री को जयणा पूर्वक उपयोग या विसर्जन करें।*
*♻👉👉साथ ही एक बात और आजकल एक नया ट्रेण्ड चला है कोई भी पोस्ट, गीत, मुक्तक या शायरी में, से जिसने लिखी है उसका नाम हटाकर अपने नाम से पोस्ट करने का और वाह-वाही लूटने का*🌹
♻ *ये एक प्रकार से ज्ञान की चोरी हुई,जिससे हमें अदत्तादान का दोष लगता है।*
*♻लेकिन बुद्धिजीवी वर्ग ये कहां समझते है कि ये करके आप किस कर्म का बंध कर रहे है ।कहते हे ना कि.........*
*🙏हम प्रभु महावीर को मानते तो है पर प्रभु महावीर की मानते नहीं हैं*
*♻👉तो क्या ये हम बुद्धिजीवियों को शोभा देता है ⁉🤔*
*♻ हम सभी इस कर्म से होने वाले बंध को रोक सकते है।*
*♻वर्तमान मे परिस्थितियाँ इस प्रकार बनी हुईं है कि हम चाहकर भी अपने आपको आशातना से रोक नही पाते।*
*♻ किंतु हमे कम से कम दोष लगे इतनी जयणा हम कर ही सकते है।*
🙏 *अंतत: हमें ये दुर्लभ मनुष्य भव मिला है और उस पर ये उत्तम जैन कुल तो हमे और कर्मों का बंध करने के बजाय कर्मो की निर्जरा करनी है।*
*जिनाज्ञा विरूध्द कुछ भी लिखा हो तो मिच्छामी दुक्कडम 🙏🙏*
*🙏🌹संगीता बागरेचा🌹🙏*|

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