कोमल हूँ कमजोर नहीं



*|| श्री नाकोड़ाजी ||*

*कोमल हूँ कमजोर नहीं.......*

*गिरती पड़ती संभलती हूँ,*
*कोमल हू कमजोर नहीं .....*

*तपते मरूस्थल में भी*
*कदम आगे बढ़ाती हूँ*
*जीवन के तुफानो से*
*हर पल टकराती हूँ*

*कोमल हू कमजोर नहीं ......*

*कहीं हार ना जाऊँ*
*इसलिए लडती हूँ*
*विपरित परिस्थितियों में*
*जीत का हौसला रखती हूँ*

*कोमल हूँ कमजोर नहीं ........*

*दर्द और मीठी चुभन से*
 *सुबह शाम गुजरती हूँ*
*निराशा के अंधकार में*
*उम्मीद की लौ जलाती हूँ*

*कोमल हूँ कमजोर नहीं.......*

*कुछ करने की चाहत में*
*जीवन में संघर्ष करती हूँ*
*राह कितनी हो कठिन*
*सत्य को ही चुनती हूँ*

*कोमल हूँ कमजोर नहीं......*

*जीवन का सीधा गणित*
*सादगी से समझाती हूँ*
 *संगी मान दो, मान लो,*
*आत्मसम्मान को चुनती हूँ ।।*

*कोमल हूँ कमजोर नहीं......*

*🙏🌹संगीता बागरेचा🌹🙏*

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