*सोचो समझो और जागो*
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*.....अब और सहा नहीं जाता,*
*....और कुछ कहा नहीं जाता,*
*कब तक हमारा समाज रहेगा नारी जाति के प्रति संज्ञा शून्य*
*और किसी का तो पता नहीं मगर अपनी हवस मिटाने महिलाओं बच्चियों से रेप करने वालों का सचमुच कोई धर्म नहीं होता*
*बलात्कारी नरपिशाच, नराधम किसी जाति धर्म कौम से संबधित नही*
*इन हैवानों का नहीं होता दिन ईमान कोई*
*कैसे होंगे नर पिशाच वो जिनमे बचा न एहसास कोई*
*या भूल गए उनके घर भी होगी बेटी कोई*
*समाज कहता हैं देवी का रूप लड़कियों को, फिर कैसे होता अन्याय यहीं.......*या लडकी होना ही बन जाता अभिशाप कोई*
*मिल गया है अवसर इन चाटुकारो को कर रहा है*
*धर्म और जाति के नाम राजनीति हर कोई*
*केंडल मार्च निकाल सभाए भरेगे या बंद का ऐलान भी करेगे* *उसके बाद क्या...⁉क्या सही में बलात्कार रोक पाएगे कोई*⁉
*नहीं क्योंकि हर पल हर क्षण किसी न किसी के साथ तो बलात्कार तो हो ही रहा है कही शारीरिक तो कही मानसिक........*कही घटनाए नजर में आती है कही कई वर्षो तक यौन शोषण होता ही रहता है और अंदर ही अंदर मामलों को दबा दिया जाता है*
*तो इसके लिए जिम्मेदार कौन.....⁉आप हम समाज* *सरकार या लचर कानून व्यवस्था*
*किसको दोष देगे आप..........⁉*
*इसके लिए हमे सिरे से सभी पहलुओ पर गौर करना होगा साथ समय की माँग है कि हम किसी और के भरोसे ना रहकर स्वयं ही जागृत होना होगा...........*
बलात्कार के पहलुओं पर गौर करें तो कुछ प्रमुख कारण सामने आते हैं-
*फैलता नशा*
नशा आदमी की सोच को विकृत कर देता है. उसका स्वयं पर नियंत्रण नहीं रहता और उसके गलत दिशा में बहकने की संभावनाएं शत-प्रतिशत बढ़ जाती हैं. ऐसे में कोई भी स्त्री उसे मात्र शिकार ही नजर आती है.
अभी तक की सारी रिपोर्ट देखी जाएं तो 85 प्रतिशत मामलों में नशा ही प्रमुख कारण रहा है. हमारे देश में नशा ऐसे बिक रहा है जैसे मंदिरों में प्रसाद. आपको हर एक किलोमीटर में मंदिर मिले ना मिले पर शराब की दुकान जरुर मिल जाएगी. और शाम को तो लोग शराब की दुकान की ऐसी परिक्रमा लगाते हैं की अगर वो होवे मिली तो प्राण ही सूख जाएंगे.
*पुरूषो की मानसिक दुर्बलता*
स्त्री देह को लेकर बने सस्ते चुटकुलों से लेकर चौराहों पर होने वाली छिछोरी गपशप तक और इंटरनेट पर परोसे जाने वाले घटिया फोटो से लेकर हल्के बेहूदा कमेंट तक में अधिकतर पुरुषों की गिरी हुई सोच से हमारा सामना होता है. पोर्न फिल्में और फिर उत्तेजक किताबें पुरुषों की मानसिकता को दुर्बल कर देती हैं और वो उस उत्तेजना में अपनी मर्यादाएं भूल बैठता है. और यही तनाव ही बलात्कार का कारण होता है.
*ईश्वर ने नर और नारी की शारीरिक संरचना भिन्न इसलिए बनाई कि यह संसार आगे बढ़ सके. परिवेश में घुलती अनैतिकता और बेशर्म आचरण ने पुरुषों के मानस में स्त्री को मात्र भोग्या ही निरूपित किया है. यह आज की बात नहीं है बल्कि बरसों-बरस से चली आ रही एक लिजलिजी मानसिकता है जो दिन-प्रतिदिन फैलती जा रही है. हमारी सामाजिक मानसिकता भी स्वार्थी हो रही है. फलस्वरूप किसी भी मामले में हम स्वयं को शामिल नहीं करते और अपराधी में व्यापक सामाजिक स्तर पर डर नहीं बन पाता.*
*महिलाओ का कमजोर आत्मविश्वास*
महिलाओं का अगर आत्मविश्वास प्रबल हो तो कोई भी पुरुष उनसे टक्कर नहीं ले सकता. महिलाओं को शारीरिक रूप से सबल बनना चाहिए और वो मन से भी खुद मजबूत समझें. विपरीत परिस्थितियों से लड़ने की ट्रेनिंग उन्हें बचपन से ही मिलनी चाहिए. हमारा समाज लड़कियों की परवरिश इस तरह से करता है कि लड़की खुद को कमजोर और डरपोक बनाती चली जाती है.
हमें अपनी बेटियों को निडर बनाना चाहिए. महिलाओं को अपने साथ अपनी सुरक्षा के साधन हमेशा साथ रखने के लिए हमें उन्हें जागरूक करना चाहिए. महिला अगर डरी-सहमी, खुद को लाचार समझती है तो उसे परेशान करने वालों का विश्वास कई गुना बढ़ जाता है. महिला की बॉडी लैंग्वेज हमेशा आत्मविश्वास से भरपूर होना चाहिए. अगर भीतर से असुरक्षित महसूस करें तब भी अपनी बेचैनी से उसे जाहिर ना होने दें.
एकांत मे मवालियो का अड्डा
गांव और शहर के सुनसान खंडहरों की बरसों तक जब कोई सुध नहीं लेता है तब यह जगह आवारा और आपराधिक किस्म के लोगों की समय गुजारने की स्थली बन जाती है. फार्म हाऊस में जहां बिगड़ैल अमीरजादे इस तरह के काम को अंजाम देते हैं वहीं खंडहरों में झुग्गी बस्तियों के गुंडे अपना डेरा जमाते हैं. बड़े-बड़े नेता/अफसर/उद्योगपति लोग अपना फार्म हाऊस बना लेते हैं, और वहां हकीकत में होता क्या है ये कोई सुध नहीं लेता. यह जगह पुलिस और प्रशासन से दूर जहां इन लोगों के लिए 'सुरक्षित' होती है वहीं एक अकेली स्त्री के लिए बेहद असुरक्षित. महिला के चीखने-पुकारने पर भी कोई मदद के लिए नहीं पहुंच सकता. बलात्कार के 60 प्रतिशत केस में ऐसे ही मामले सामने आए हैं.
*ये तो ठिक समाज के ठेकेदार बन बैठे लोग कई बार मदद करने के बहाने भी महिलाओ का यौन शोषण करते है कभी डराकर या कभी बहला फुसलाकर ........कभी प्यार का वास्ता देकर ........ऐसे लोगो से बचा जाय*
*आजकल तो एक नयी टेक्नोलॉजी एफबी पर मित्र बनाओ फिर उनके नंबर लो फिर अपने जाल मे फंसाओ ये एक नया ट्रेंड चला है जिसमे हमारी सो काल्ड मार्डन नारीया आसानी से शिकार हो रही है । इन सब से जरूर बचे*
*लचर कानून*
हमारे देश का कानून लचर है, ये सब मानते हैं. अगर कानून सख्त हो तो शायद अपराधिक मामलों की संख्या बहुत कम हो जाती. कमजोर कानून और इंसाफ मिलने में देर भी बलात्कार की घटनाओं के लिए जिम्मेदार है. देखा जाए तो प्रशासन और पुलिस कमजोर नही हैं, कमजोर है उनकी सोच और समस्या से लड़ने की उनकी इच्छा शक्ति. पैसे वाले जब आरोपों के घेरे में आते हैं तो प्रशासनिक शिथिलताएं उन्हें कटघरे के बजाय बचाव के गलियारे में ले जाती हैं. पुलिस की लाठी बेबस पर जितने जुल्म ढाती है सक्षम के सामने वही लाठी सहारा बन जाती है. अब तक कई मामलों में कमजोर कानून से गलियां ढूंढ़कर अपराधी के बच निकलने के कई किस्से सामने आ चुके हैं. कई बार सबूत के आभाव में न्याय नहीं मिलता और अपराधी छूट जाता है.
*करना ही चाहते हो सही मायने में कुछ तो*
*छोड़ ढकोसलाबाजी की राजनीति*
*सारे स्वार्थ से परे उठ जन जागृति लाओ तुम*
*शिक्षित बनाओ समाज को तुम*
*सारे स्वार्थ से परे उठ जन जागृति लाओ तुम*
*धर्म और राजनीति के नामपर अपना उल्लु ना सीधा करो तुम*
*आज यहा किसी और की बेटी है कल ये तुम्हारी भी हो सकती है इस सच को समझो तुम...*
*बेटियों को देवी ना बनाओ,उन्हें बेटी ही रहने दो...,*
*पूजा ना करो उनकी,बस आँसू उनके बहने ना दो...!!*
*फिर कोई बेटी नोची खसोटी ना जाय इतना सबल सक्षम बेटी को बनाओ तुम*
*अंततः आज हमें बलात्कार को धर्म, मजहब के चश्मे से नहीं देखना चाहिए. बलात्कारी कहीं भी हो सकते हैं, किसी भी चेहरे के पीछे, किसी भी बाने में, किसी भी तेवर में, किसी भी सीरत में. बलात्कार एक प्रवृति है. उसे चिन्हित करने, रोकने और उससे निपटने की दिशा में यदि हम सब एकमत होकर काम करें तो संभवतः इस प्रवृत्ति का नाश कर सकते हैं.*
*जहाँ यौन हिंसा को रोकने के लिए मजबूत कानून की जरूरत है, वही सामाजिक मानसिकता में कुछ बदलाव करने की भी जरूरत है|इसलिए अगर हो सके तो हमें न केवल लड़कियों बल्कि हर बच्चे को यौन शिक्षा के बारे में समझाना चाहिए, ताकि फिर कभी किसी लड़की के साथ कुछ गलत न हो सके.*
*NOTE-सिर्फ लेख लिखने या पढने फारवर्ड करने से कुछ नही होगा ठोस कदम उठाना ही इस प्रवृत्ति का नाश कर सकता है*इसकी शुरूआत कल आज से नही अभी से हमारे घर परिवार से करे यही मेरी सभ्य समाज से अपील है 🙏🙏*
*😔💱संगीता बागरेचा(संगी) 💱*




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