बात सच्ची पर कडवी
*|| श्री नाकोड़ाजी ||*
*बात कडवी पर सच्ची....*
बात कडवी जरूर है
किंतु है एकदम सच्ची,
सुधारना है आपको,
तो देने पड़ेंगे *चटके..*
सोच भी अच्छी,
काम भी अच्छे
पर क्यों भाई
तुम मतवाद में *अटके...*
ओसवाल , पोरवाल
और ना जाने कौनसे वाल
वीर की संतान हो,
फिर क्यों पंथवाद में *उलझे..*
श्रावक तो उलझे
भटके मटके पर,
क्यों हमारे संत महात्मा
भी संप्रदाय-संघाले में *भटके..*
दिल, दिमाग, दया
ममत्व करूणा भी है,
कहलाते जिनियस है
फिर क्यूँ चापलूसो के लेते *लटके...*
और तो और भौतिकता
दिखावे और मौज मस्ती
के छोटे बड़े सभी
को है बड़े *चसके ....*
आज तुम हो अल्पसंख्यक,
फूट अगर रहीं तो
कल नहीं रहोगे नक्शे पर
फिर कहोंगे, सबको हम *खटके...*
ना इधर ना ऊधर के रहोगे
संगी फिर कहोगे
आसमान से *टपके...*
मत मतान्तर के चलते खजूर में *अटके....*
युग पुरूष जो बनना है,
प्रभावना जिन शासन
की करना है तो..
काम करने पड़ेंगे *हटके...*
वीर पथगामी हो,
वीर गुण अपनाओ तुम,
कदम बढाओ मिल के
वरना दे जाएगा कोई भी *झटके...*
आओ छोडो ये सब
विविध होकर भी एक बनें
मिसाल सत्य-अंहिसा
की बनकर विश्वपटल पर *झलके..*
🙏🌹 *संगीता बागरेचा (संगी)*🌹🙏
*बात कडवी पर सच्ची....*
बात कडवी जरूर है
किंतु है एकदम सच्ची,
सुधारना है आपको,
तो देने पड़ेंगे *चटके..*
सोच भी अच्छी,
काम भी अच्छे
पर क्यों भाई
तुम मतवाद में *अटके...*
ओसवाल , पोरवाल
और ना जाने कौनसे वाल
वीर की संतान हो,
फिर क्यों पंथवाद में *उलझे..*
श्रावक तो उलझे
भटके मटके पर,
क्यों हमारे संत महात्मा
भी संप्रदाय-संघाले में *भटके..*
दिल, दिमाग, दया
ममत्व करूणा भी है,
कहलाते जिनियस है
फिर क्यूँ चापलूसो के लेते *लटके...*
और तो और भौतिकता
दिखावे और मौज मस्ती
के छोटे बड़े सभी
को है बड़े *चसके ....*
आज तुम हो अल्पसंख्यक,
फूट अगर रहीं तो
कल नहीं रहोगे नक्शे पर
फिर कहोंगे, सबको हम *खटके...*
ना इधर ना ऊधर के रहोगे
संगी फिर कहोगे
आसमान से *टपके...*
मत मतान्तर के चलते खजूर में *अटके....*
युग पुरूष जो बनना है,
प्रभावना जिन शासन
की करना है तो..
काम करने पड़ेंगे *हटके...*
वीर पथगामी हो,
वीर गुण अपनाओ तुम,
कदम बढाओ मिल के
वरना दे जाएगा कोई भी *झटके...*
आओ छोडो ये सब
विविध होकर भी एक बनें
मिसाल सत्य-अंहिसा
की बनकर विश्वपटल पर *झलके..*
🙏🌹 *संगीता बागरेचा (संगी)*🌹🙏



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