युवा पीढ़ी के पतन का जिम्मेदार कौन?
*|| श्री नाकोड़ाजी ||*
*सोचो समझो और जागो*
*दिखता ये हरा भरा*
*उजडा हुआ चमन है*
*भोग लिप्सा में लिपटा*
*मानव का उठता हर कदम है*
*सुनायी देता है संगी को*
*दादा सबका ये रूदन है*
*प्रेम करूणा का हो सबल*
*इसी में सफल जनम है।।*
🙏🌹 *संगी*🌹🙏
*युवाओं का होता पतन, धार्मिक सामाजिक भारतीय संस्कृति का इंडियन पाश्चात्य संस्कृति में होता पलायन........जिम्मेदार कौन आप हम या युवा पीढ़ी⁉⁉*
♻शायद आज का लेख आप सभी को पढकर पसंद ना भी आए किंतु सत्य तो हमेशा से ही कडवे नीम की तरह ही रहा है।भले ही पहले कडवा फिर मिठास यहीं सत्य की तासीर है।
खैर जाने दिजिए यहाँ हम बात कर रहे है ... *आज की पतनोन्मुख होती युवा पीढ़ी की........*
♻यहाँ कसूर या दोष कुछ अपवाद छोडकर युवाओं का रत्तीभर भी नही है वो जो बचपन से देख सुन रहे है उसी को तो follow कर रहे है। इसलिए ही आज की युवा पीढ़ी के पतन के लिए 100%हम जिम्मेदार है।
अब आप कहेगे कैसे ??आइए इसे समझते है.....
👉एक नन्हा शिशु जब माता की कोख में अवतरण करता है तभी से हम जैसे उसे स्टार बना देंगे वैसे सपने देखते है बाते वैसी स्टाइल वैसा ही....
♻जब वो पैदा होता है तभी से उसे लोरी की जगह मोबाईल की रिंगटोन से जागना सोना
♻थोड़ा बड़ा हुआ नही की झुनझुने की जगह फिर मोबाइल गीत या यू टूयूब पर गीत वगैरह का चस्का लगा देते है (फिर कहते है बडे जोश से हमारे बेबी को तो मोबाइल मे गीत सुने बगैर नींद ही नही आती)
👉यहा तक तो ठिक बच्चा फिर भी नासमझ होता है लेकिन उसके बाद क्या ??⁉
👉आज संयुक्त परिवार तो रहे नहीं ।मुंबई जैसे महानगरो में एकल परिवार, जगह की कमीऔर बड़ा होता बच्चा अपने माता पिता के *परिणय संबंधों* का भी अनचाहे ही साक्षी बन जाता है जिसका उसके कोमल मन पर विपरित असर होता है। साथ ही लाड मे आकर *पेरन्टस बढते बच्चों को I LOVE U, KISS करना ,ऑख मारना वगैरह वगैरह सिखाने मे अपनी शान समझते है *(अपवाद रूप धार्मिक परिवारो में जय जिनेन्द्र बोलना, सेवा पूजा दर्शन ect धार्मिक संस्कारभी दिए जाते है।)*
👉यहाँ तक तो ठिक उसके बाद का नजारा क्या है,वो भी आप सभी जानते है ........पापा ऑफिस या काम पर चले जाते हैं और हमारी सो काॅल्ड मार्डन माॅम(माताजी) चल देती है *किटी पार्टी या किसी और सोशियल इवेन्ट पर* बच्चों को आया के हवाले करके.....या माता पिता अगर काम काजी है तो बच्चे आया के भरोसे पलते बढ़ते हैं। तब क्या संस्कार मिलेगे वो भी आप सोचिए ।क्योंकि दादा -दादी के साथ रहने के जमाने तो अब रहे नहीं ...
*♻यहाँ आते-आते युवा होते बच्चे*अकेलेपन का शिकार होते हैं।*
♻और आज की सबसे बड़ी समस्या ही *युवाओं के साथ अकेलेपन और प्यार की कमी है*
♻ उन्हे मंहगे से महंगे उपहार ,कपडे लत्ते, गजेट्स मोबाइल, लैपटाप इत्यादि देकर हम समझते है हमने अपने बच्चों को वो सब दे दिया जिसकी उन्हे आज जरूरत है *पर हम ये कभी नही समझते की हमारा प्यार ये महँगे उपहार नही हमारा समय और अपनापन हैं जिस पर भी बच्चों का अधिकार हैं ।*
♻लेकिन ये सब समझने के लिए हमारे पास वक्त ही तो नहीं हैं
*हम स्वयं भी अंधी दौड़ (चाहे वो कैरियर को लेकर हो या फैशन )दौड़ रहे हैं ।*
♻हम कमा किसके लिए रहे हैं उनके लिए ही तो ....फिर हम समय दे या नही क्या फर्क पडता है।
और इसी अकेलेपन की मुख्य वजह से *युवा इंटरनेट मोबाइल और दोस्तों में टाइम पास करते है लेकिन इसके आगे वो किस हद तक जाते ये जानने की फुर्सत आपको नहीं होती आप तो तब जगते है जब तक कोई बडा हादसा(लव जेहाद ,सुसाइड) नही हो जाता*
👉फिर आता है आप जब भी बच्चो के साथ होते है उस वक्त का आपका व्यवहार आपका *बच्चों के साथ मिलकर टी वी सिरियल देखना ,रोमान्टिक मुवीज देखना(बीड़ी जलाइले,बेबी डाॅल में सोने दी)जैसे अश्लील गीत ये सब जिसमें कितना कुछ क्या दिखाते है मुझे यहा बताने की जरूरत नहीं है।*
*👉मोबाईल के माध्यम से आप जो खतरनाक जोक्स, ग्लेमर से भरपूर विडियो इधर ऊधर करते है) तो *सोचिए आप अगर ये सब करते है तो आपके बच्चों से आप क्या उम्मीद करेंगे ........*
*♻आप थ्री स्टार ,फाइव स्टार नोनवेज होटेल मे जाना क्लब ,पार्टी, पब में जाना, एक हाथ मे जाम दूसरे किसी खुबसूरत ललना की कमर मे हाथ डालकर डान्स अपनी शान समझते है ।*
*♻वहीं मम्मीजी भी पिछे क्यों रहे युवा दिखना है इसलिए युवाओ जैसे छोटे कपड़े पहनना भी जरूरी है।*
आप अपना मेकओवर नही करेगे तो लोग आपको गंवार जो कहेंगे। *इसलिए आप अपनी फूहडता और अंग प्रदर्शन में अपनी शान समझते है।*
*♻तो आपके बच्चे भी तो इसे अपनी आन समझेंगे(इसमे समाज के ठेकेदार बने बैठे परिवार एव बच्चे सबसे ज्यादा इन्वाल्व है)*
*♻हमारी बेपरवाही की वजह से जहाँ बचपन मे अच्छे संस्कार का सिंचन नहीं हो पा रहा है।
*
♻वहीं जमाने के साथ कदम पे कदम मिला ने के लिए हम लोगो ने अपनी *संस्कृति की विस्मृत्ति* कर लिया है ।
*हम सभी भौतिकतावादी हो गए है।*
*ये तो हुई हमारी बात अब हम आते हैआज की युवा पीढी पर तो मुझे.......*
♻ *एक अंग्रेज लेखक के ये शब्द याद आते है -women is the slave of fashion &man is the slave of women.*
👆 *सचमुच ये शब्द आज के अधिकांश युवक युवतियों के जीवन दर्शन का अवश्य संकेत करते है।*
*♻आज की युवा पीढ़ी का जीवन फैशनपरस्त हो गया है।उसमें भी हमारा ही हाथ है*
*प्रकृति प्रदत्त सौन्दर्य का रक्षण करने के बजाय उसे प्रदर्शन की वस्तु बना दी गईं है।*
*जो वस्त्र, मर्यादापालन व शीलरक्षा के लिए थे आज फैशन की गुलामी के कारण युवा उन्हीं वस्त्रों के द्वारा अंग प्रदर्शन मे अपनी शान समझते है।*
*युवाओ में चारित्रिक पतन का कारण "काम" की मर्यादा का उल्लंघन भी है।*
*♻संपूर्ण ब्रह्मचर्य पालन मे असमर्थ व्यक्ति के लिए जो सुनियोजित लग्न व्यवहार व उसके चारों और जो मर्यादाएँ थी उन मर्यादाओ का आज खुलेआम उल्लंघन हो रहा है।*
*♻स्त्री जोअर्धागिनी सम्मानीय थी उसके बजाय उसे भोग्या की नजर से देखा जाने लगा है।*
*परिणामस्वरूप वासना का अतिरेक होने लगा है।*
*♻और उसमे T V ब्लू फिल्म, इंटरनेट अश्लील साहित्य आदि ने आग मे घी डालने का काम किया है।*
♻ *आज कल के जेट युग मे कंप्यूटर , टीवी , सेल फोन और इंटरनेट के जमाने मे जिंदगी इतनी फास्ट हो गयी है की हम कुछ सोचे - ना सोचे तब तक विज्ञान कुछ नई शोध ले कर हाजिर हो जाता है ।*
* *इन सब का सही उपयोग कम और गलत उपयोग ज्यादा हो रहा है ।*
*👉फिर रोना रोते है लव जिहाद का, बच्चों के अफेयर का, ड्रग्स लेने का.........वगैरह वगैरह का*
*👉अरे आपने जो बोया है वो तो काटना ही है इसमे दोष किसी का नही आपका ही है*
♻ *उपरोक्त सब माध्यम में जितनी अच्छी और काम की चीज होती है उस से कई ज्यादा फिजूल की चीजें मिलती है । जिस से आज कल के नव युवक / युवती के संस्कार बिगड़ रहे है ।*
♻ *इस से हमारी संस्कृति का नाश हो रहा है और हम हमारे धर्म के मूल्य से विमुख हो रहे है ।*
♻ *हम लोग पल पल अपने संस्कार भुल रहे है और पाश्चात्य संस्कृति को अपना रहे है ।*
♻ *जिसमे ना तो कुछ विनय है और ना ही सच्चे धर्म का अंश ।*
*हम सब भौतिकतावाद के चक्कर मे फंस गए है और इस की चुंगल मे से निकलना बहुत मुश्किल है ।*
✍🏼
*परिणामस्वरूप युवाओ का नैतिक व चारित्रिक पतन होने लगा है।*
♻ *हमे सच्ची राह दिखाने वाले धर्म गुरु मौजुद है पर आज कल के युवक / युवती को उस मे रस नही है । क्योंकि माता -पिता को ही रस नही है*
*♻इन सब कारण की वजह से आज की युवा पीढ़ी पतनोन्मुख हो रहे है ।*
🙏🙏 *अंतत: यहीं कहना चाहूँगी ,कि हमे हमारी युवा पीढ़ी को पतन से बचाना है तो......*
*🙏 सर्व प्रथम अपने आप को सुधारिए ...बड़े बुजर्गो का मान करना सिखिए,*
*दिखावे की दुनिया से निकल कर हकीकत को अपनाइए।*
🙏 *आज के अत्याधुनिक युग और नैतिक मूल्यो दोनों मे बैलेन्स कर के चलना होगा*
*उन्हें अंधेरे कुएँ मे गिरने से बचाना होगा*
🙏 *सही संस्कारों का सिंचन करना होगा।*
*अपने बच्चों को अपना किंमती समय ममत्व ,अपनापन, Quality time दिजिए*
🙏कहते है *चैरिटी बिगेन्स होम* शुरूआत घर से किजिए समाज देश अपने आप सुधर जाएगा पोस्ट को, विडियो को ,इधर से उधर फारवर्ड करना आसान है चीजों को स्वयं पर लागु करना मुश्किल है पर नामुमकिन नहीं है।
कहीं कही विषयानुसार सत्य का आईना दिखाने हेतू कठोर शब्दों का प्रयोग करना पड़ा इसे अन्यथा न लेते हुए विचारो को समझे.
*🙏🌹संगीता बागरेचा (संगी)🌹🙏*

Comments
Post a Comment