मोको का ढूँढे रे बंदे.....





*|| श्री नाकोड़ाजी ||*

*दिल से.............✍🏼*

*मोको का ढूँढे रे बंदे.......*
               *🙏संगी*

*♻परमात्मा वितरागी के प्रेम को आप खोजना चाहते हो पर उसकी ओर सदा पीठ किए खङे रहते हो । भक्ति केवल पात्र को ही मिलता है अपात्र को नहीं, इसलिए प्रेम सदा पूछता है, "कौन" ?*

 *♻आप स्नेह तो सभी से चाहते हो लेकिन उस स्नेह के योग्य नहीं बनते । इसी कारण जीवन बिन स्नेह सुख के रूखा रूखा ही बीत जाता है ।*

 *♻आप चाहते तो हो कि स्नेह रूपी अमृत रस बरसे लेकिन पात्र तुम्हारा अमृत को संभालने योग्य नहीं है ।*

 *♻चाहते विराट को हो लेकिन भीतर जगह क्षुुद्र के लिए भी नहीं है ।*

*♻बुलाते परमात्मा को हो पर उसके लिए दिल में घर साधारण मेहमान का ही बनाया है ।*  ✒

*♻उसको चाहने से पहले अपने आप को तैयार तो करना ही पङेगा । अन्यथा हाथ मलने पड़ सकते हैं ।*

*♻आप उसको पाने की विधियां पूछते हुए घूमते रहते हो । अगर विधि काम नहीं कर रही है तो निःसंदेह विधि गलत हैं ।*

♻कितनी मजेदार बातें है कि आप विधि बदलने को तैयार हो । शास्त्र बदलने को तैयार हो । धर्म बदलने को तैयार हो । गुरू भी बदल लेते हो । *लेकिन खुद को बदलने का प्रयास नहीं करते हो साथी ।*

 *♻लोग कहते हैं कि हम अनेक गुरूओं के पास भटके हैं । अनेक धर्म स्थान ,उपाश्रय एवं आश्रमों में गये हैं । इस गुरू से उस गुरू के पास गए हैं लेकिन कुछ नहीं होता ।*

 *♻मगर खुद से एक जरूरी सवाल नहीं पूछते कि ::::कितने गुरू तुम्हारे सामने हार जाते हैं और कितने शास्त्र पराजित हो जाते हैं ! कहीं ऐसा तो नहीं कि तुम्हारी पात्रता में ही दोष हो ?*

*♻सत्य तो यह है कि आप मांगते तो हो पर कभी खुद को उस योग्य बनाते नहीं । और बिना योग्यता के कुछ मिल नहीं सकता ।*

*♻दरवाजे बन्द करके सूरज को पुकारते हो । बन्द आंखों से मंजिल देखना चाहते हो । इसी लिए आपसे पूछा जाता है कि कौन हो ? इसी लिए द्वार खटखटाते हुए घूमते हो ।*

 ♻अपनी पहचान एक सही पात्र वाली बना लोगे तो कोई यह नहीं पूछेगा कि तुम कौन हो ?

*♻सभी यही कहेंगे कि यह तो अपने परम तारक परमात्मा का प्यारा सेवक है।*

 ♻फिर परमात्मा को ,स्नेह को,स्व को तलाशना नहीं पङेगा । भक्ति सागर में डुबकी लग जाएगी । फिर परमात्मा की तरफ पीठ करके खङे नहीं रहोगे । आमने सामने साक्षात दर्शन होंगे अपने वास्तविक स्नेह प्रिय वितरागी के ।

 *सारे मसरूफ़ हैं यहाँ,*
*दूसरों की कहानियाँ जानने में,*
*इतनी शिद्दत से ख़ुद को*
*अगर पढ़ते, तो..महान हो जाते.*
 *समय अभी हाथ तेरे है*
*चेत संगी चेतन बन जा*
*सुर लगा भक्ति-भाव के*
               *प्रभुमय बन जा*

🙏🌹 *जय हो पार्श्वभैरू दादा की*🌹🙏
               🌹 *संगीता बागरेचा*🌹

Comments