निठावान और चापलूसी(चाटुकारिता)


*|| श्री नाकोड़ाजी ||*

*दुनिया इसी का नाम हैं*
*चापलूसो का धाम हैं*
*तेजपत्ता बनना या हरा धनिया*
*ये विचारना आपका काम है*
*दूज का चंदा बनना या पूनम का*
*ये आपके हाथ है*
               *✒संगी*

*निष्ठा और चापलूसी(चाटुकारिता)*

*♻Loyalty यानि निष्ठा और Sycophancy यानि चाटुकारिता दोनों ही शब्दों की बहुत ही सरल व्याख्या उदाहरण के साथ की गयी है लेकिन इन दोनों ही शब्दों  का हमारे जीवन मे बहुत ही महत्वपूर्ण स्थान तो है ही दोनों ही शब्दों मे बहुत बड़ा अंतर भी है।*

*♻निष्ठावान और चापलूसी दोनो ही परिवार ,संस्था समाज या किसी व्यक्ति के संदर्भ /जुडाव में होते है।*

*♻निष्ठावान जिससे जुड़ा होता है।वहाँ वो केवल उस संस्था परिवार या व्यक्ति का हित देखता है भले ही इसके लिए उसका स्वयं  का अहित क्यों ना हो जाय ।वहीं  चाटुकार या चापलूस दिखावा तो निष्ठावान का करता है ।लेकिन जब उसके हित की बात आती है तो वह दूसरों का अहित करने मे एक पल भी नहीं सोचता हैं ।खुद बच निकलने में भलाई समझता है।इसके लिए और भी नाम है जैसे Broun-nosers,Teacher's pets or Suck-ups ect.*

*♻चापलूस दिखावे में इतने माहिर होते है कि निष्ठावान भी उसके आगे कम निष्ठावान प्रतित होते हैं ।वो हमेशा कोशिश करते रहते है कि वो स्वयं को ज्यादा निष्ठावान  दिखाए।*

*♻दूसरों के बारे में उल्टा-सीधी कहानियाँ गढ़ के उनको कमजोर साबित करें ।वो अपने अस्तित्व के लिए नंगे भी हो सकते हैं और बहुरूपिये भी।उनको लगता है कि नंगे होकर वो अपने अस्तित्व को बनाए रखने मे सफल रहें, लेकिन ऐसे व्यक्तियों का ना कोई सम्मान  होता है ना अस्तित्व ना आत्मा ना जमीर ......*

*♻वो एक पीतल पर सोने के पानी चढ़े आभूषण मात्र होते हैं जो दिखते सुंदर है लेकिन जिसकी चमक मात्र कुछ देर के लिए होती हैं ।*

*♻जबकि निष्ठावान जिससे जुड़ाव रखता है उसके प्रति अपना समर्थन, सेवा, समर्पण और त्याग प्रत्येक स्थिति एवं परिस्थिति में बनाए रखता है इससे उसका स्वयं का विकास तो होता ही है उसकी पहचान भी बनती हैं ।*

*♻परहित ,परसोच एवं निस्वार्थ भाव के साथ किए गए कार्य हमेशा सम्मान दिलाते हैं*हो सकता है इस दौर मे विरोधियों  या बाधाओं का भी सामना करना पड़ता है* लेकिन ये सब उस *सोने के आग में तपकर कुंदन बनने के समान है* जहाँ अंत में  उसका निखरा रूप ही नजर आता है

*♻यदि आप भी जीवन में  आगे बढ़ना चाहते है तो इनके अंतर को समझे और जीवन में उतारें,क्योंकी सफलता का मापदण्ड मान-सम्मान भी होता है।जो आपको बिना माँगे मिलता हैं  किसी से जबरदस्ती लेना नही पड़ता है।*

*तेज पत्ता भले ही बाहर फेंका  जाय पर जाने से पहले अपने स्वाद की महक छोड जाता हैं ।और फिर चाहे हरा धनिया सारा श्रेय क्यूँ ना ले जाय पर स्वाद तो तेजपत्ते का ही..........think about it*

*जिनाज्ञा विरूध्द कुछ भी लिखा हो तो मिच्छामी दुक्कडम*

*🙏🌹संगीता बागरेचा🌹🙏*

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