आत्ममंथन जागो जैनों जागो
*|| श्री नाकोड़ाजी||*
*आत्ममंथन*
*जोगो जैनो जागो*
*समस्त जैन समाज ,साधु साध्वी, वृंद, सभी पंथ,गच्छ ,सभी सम्प्रदाय, श्वेतांबर ,दिगम्बर अचलगच्छ खतरगच्छ सभी से सामूहिक निवेदन...............*
पालीताणा, गिरनार, सम्मेदशिखर गोरेगांव,भायंदर,फालना, तथा अन्य जगह समाज और साधु भगवंतो के बीच या साध्वीजी भगवंतो पर हमलों के बाबत .........
अति दुर्लभ जैन धर्म में जन्म मिलने और जैन धर्म में अगाध श्रद्धा के चलते बहुत ही कड़वी बात आहत मन से *संगी* की कलम से नम्र निवेदन करने जा रही है.....
सर शर्म से झुक जाता है जब कोई ये कहता है कि मेरा पंथ सही कोई कहता है मेरा गच्छ सही....इस मै सही के चक्कर में आप अपना नुकसान करते जा रहें हैं
और औरो को मौका दे रहे है अपने जैन धर्म का अपमान करने का।और मौका दे रहे है कि ये बोलने का कि आपके धर्म और समाज में फूट है ।
सभी अपनी अपनी रोटियाँ सेकने में लगे हैं।
अरे! हमारे पास समस्याओं की कमी हैं क्या जो हम चंद स्वार्थी मूढमति धर्म के ठेकेदारों के बहकावे में आ जाते हैं ।
आज सबको अपना नाम सोशल मिडिया में चाहिए इसलिए अपनी ढपली अपना राग के तर्ज पर चल रहे हैं ।
*आप सभी क्यू मूर्ख बन रहे हैं❓*
*आज के जमाने में चंद कोहिनूर तुल्य गुरु भगवंतों को छोड़कर लगभग सभी,परमात्मा अरिहंत की वाणी के अनुसार वर्तन नहीं कर रहे हैं।*
सभी ने अपने नीति नियम बना लिए।
*क्या आप परमात्मा और जिनवाणी से ऊपर हैं?❓❓❓*
*या आप ज्यादा ज्ञानी है......❓.*
*क्या सभी शास्त्रों आगमों का ज्ञान आपको प्राप्त हैं .....❓*
*क्या हम प्रभु वीर,श्री गौतमस्वामीजी ,या सुधर्मास्वामी जी से भी ज्यादा गीतार्थ ज्ञानी हैं❓❓*
समझ नही आता हमारा समाज कहां जा रहा हैं ❓❓
हम जैन सहिष्णुता से परिपूर्ण अहिंसक जीव दया मे मानने वाले करूणा और मैत्री का पाठ जग को पढाने वाले ...............क्यूँ आपस में लड़ रहे हैं ।
*मै सही* और *मै ही सही* के कारण हम अनजाने में हमारे जैन धर्म का नुकसान कर रहें हैं ।
कोई कहता हैं मेरे गुरू सही, कोई कहता है मैं सही हमारा पंथ सही
हमारे पंथ में ऐसा वैसा ना जाने क्या क्या..........
हम सभी अपने अपने विचार एक दूसरे पर थोपने ने में लगे हैं ।
आपने कभी सोचा हैं ये सब कौन कर रहा है .........ये चंद लोगो की इगोईस्टिक महत्वाकांक्षा का परिणाम है।
यहाँ ध्यान देने योग्य बात साधारण श्रावक श्राविकाओं का इसमें कोई योगदान नही है वे तो भेडचाल चल रहे हैं ।
जब जब धर्म में कट्टरता आयी हैं वो धर्म पतनोन्मुख हुआ हैं ।और हम जैन समाज वाले उत्तम क्षमा,सहिष्णु संयमी प्रभु वीर के अहिंसा के सिद्धांतों पर चलने वाले कब से इस तरह की हरकत करने लगे क्या ये हमारे आदर्श है ?
ऐसा ना हो कि हम ही हमारे समाज के पतन का कारण बन जाए ।ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती ।
*आज जो हम बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक हो गए है ।उसका जिम्मेदार कौन है*❓
*कही ऐसा ना हो आने वाले समय मे हम लुप्त प्राय हो जाए*
*वैसे भी आज की युवा पीढी धर्म विमुख होती जा रही है।*
*धर्म परिवर्तन, दूसरे समाज में विवाह इत्यादि के पीछे भी ये एक मुख्य कारण हैं ।*
*समस्त पंथो ,गच्छों संप्रदायों के गुरू भगवंतो से विनम्र निवेदन है कि वे एक मंच पर साथ आए और अपनी जिम्मेदारी मर्यादा के साथ निभाए (कुछ साधु भगवंत हैं जो एकता के इस कार्य में संलग्न हैं)*
*क्योंकि हम सर्वप्रथम तो वीर की संतान ही है। और जिनवाणी में विश्वास करने वाले है ।*
*और सर्व जैनसमाज के नाम सविनय अपील की जाती है कि आपके द्वारा कोई भी शासन विरूद्ध कार्य ना हो।*
*जो भी मसलें हो उन्हे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाए।ताकि बाहर वालों को मौका ना मिले हम पर ऊँगली उठाने का.......*
*जैन होना ये ही हमारा सम्मान*
*साधु भगवंत हमारा अभिमान*
*रजोहरण का हमेशा रखे मान*
*अपने अपने नियम बनाकर*
*ना बनाओ तुम अब अपना संविधान*
*नहीं तो कोई भी कर जाएगा,*
*तुम्हारी अस्मिता का अपमान*
जिनाज्ञा विरूध्द कुछ भी लिखा हो तो मिच्छामी दुक्कडम
*संगीता बागरेचा (संगी)*
*आत्ममंथन*
*जोगो जैनो जागो*
*समस्त जैन समाज ,साधु साध्वी, वृंद, सभी पंथ,गच्छ ,सभी सम्प्रदाय, श्वेतांबर ,दिगम्बर अचलगच्छ खतरगच्छ सभी से सामूहिक निवेदन...............*
पालीताणा, गिरनार, सम्मेदशिखर गोरेगांव,भायंदर,फालना, तथा अन्य जगह समाज और साधु भगवंतो के बीच या साध्वीजी भगवंतो पर हमलों के बाबत .........
अति दुर्लभ जैन धर्म में जन्म मिलने और जैन धर्म में अगाध श्रद्धा के चलते बहुत ही कड़वी बात आहत मन से *संगी* की कलम से नम्र निवेदन करने जा रही है.....
सर शर्म से झुक जाता है जब कोई ये कहता है कि मेरा पंथ सही कोई कहता है मेरा गच्छ सही....इस मै सही के चक्कर में आप अपना नुकसान करते जा रहें हैं
और औरो को मौका दे रहे है अपने जैन धर्म का अपमान करने का।और मौका दे रहे है कि ये बोलने का कि आपके धर्म और समाज में फूट है ।
सभी अपनी अपनी रोटियाँ सेकने में लगे हैं।
अरे! हमारे पास समस्याओं की कमी हैं क्या जो हम चंद स्वार्थी मूढमति धर्म के ठेकेदारों के बहकावे में आ जाते हैं ।
आज सबको अपना नाम सोशल मिडिया में चाहिए इसलिए अपनी ढपली अपना राग के तर्ज पर चल रहे हैं ।
*आप सभी क्यू मूर्ख बन रहे हैं❓*
*आज के जमाने में चंद कोहिनूर तुल्य गुरु भगवंतों को छोड़कर लगभग सभी,परमात्मा अरिहंत की वाणी के अनुसार वर्तन नहीं कर रहे हैं।*
सभी ने अपने नीति नियम बना लिए।
*क्या आप परमात्मा और जिनवाणी से ऊपर हैं?❓❓❓*
*या आप ज्यादा ज्ञानी है......❓.*
*क्या सभी शास्त्रों आगमों का ज्ञान आपको प्राप्त हैं .....❓*
*क्या हम प्रभु वीर,श्री गौतमस्वामीजी ,या सुधर्मास्वामी जी से भी ज्यादा गीतार्थ ज्ञानी हैं❓❓*
समझ नही आता हमारा समाज कहां जा रहा हैं ❓❓
हम जैन सहिष्णुता से परिपूर्ण अहिंसक जीव दया मे मानने वाले करूणा और मैत्री का पाठ जग को पढाने वाले ...............क्यूँ आपस में लड़ रहे हैं ।
*मै सही* और *मै ही सही* के कारण हम अनजाने में हमारे जैन धर्म का नुकसान कर रहें हैं ।
कोई कहता हैं मेरे गुरू सही, कोई कहता है मैं सही हमारा पंथ सही
हमारे पंथ में ऐसा वैसा ना जाने क्या क्या..........
हम सभी अपने अपने विचार एक दूसरे पर थोपने ने में लगे हैं ।
आपने कभी सोचा हैं ये सब कौन कर रहा है .........ये चंद लोगो की इगोईस्टिक महत्वाकांक्षा का परिणाम है।
यहाँ ध्यान देने योग्य बात साधारण श्रावक श्राविकाओं का इसमें कोई योगदान नही है वे तो भेडचाल चल रहे हैं ।
जब जब धर्म में कट्टरता आयी हैं वो धर्म पतनोन्मुख हुआ हैं ।और हम जैन समाज वाले उत्तम क्षमा,सहिष्णु संयमी प्रभु वीर के अहिंसा के सिद्धांतों पर चलने वाले कब से इस तरह की हरकत करने लगे क्या ये हमारे आदर्श है ?
ऐसा ना हो कि हम ही हमारे समाज के पतन का कारण बन जाए ।ताली कभी एक हाथ से नहीं बजती ।
*आज जो हम बहुसंख्यक से अल्पसंख्यक हो गए है ।उसका जिम्मेदार कौन है*❓
*कही ऐसा ना हो आने वाले समय मे हम लुप्त प्राय हो जाए*
*वैसे भी आज की युवा पीढी धर्म विमुख होती जा रही है।*
*धर्म परिवर्तन, दूसरे समाज में विवाह इत्यादि के पीछे भी ये एक मुख्य कारण हैं ।*
*समस्त पंथो ,गच्छों संप्रदायों के गुरू भगवंतो से विनम्र निवेदन है कि वे एक मंच पर साथ आए और अपनी जिम्मेदारी मर्यादा के साथ निभाए (कुछ साधु भगवंत हैं जो एकता के इस कार्य में संलग्न हैं)*
*क्योंकि हम सर्वप्रथम तो वीर की संतान ही है। और जिनवाणी में विश्वास करने वाले है ।*
*और सर्व जैनसमाज के नाम सविनय अपील की जाती है कि आपके द्वारा कोई भी शासन विरूद्ध कार्य ना हो।*
*जो भी मसलें हो उन्हे शांतिपूर्ण ढंग से सुलझाए।ताकि बाहर वालों को मौका ना मिले हम पर ऊँगली उठाने का.......*
*जैन होना ये ही हमारा सम्मान*
*साधु भगवंत हमारा अभिमान*
*रजोहरण का हमेशा रखे मान*
*अपने अपने नियम बनाकर*
*ना बनाओ तुम अब अपना संविधान*
*नहीं तो कोई भी कर जाएगा,*
*तुम्हारी अस्मिता का अपमान*
जिनाज्ञा विरूध्द कुछ भी लिखा हो तो मिच्छामी दुक्कडम
*संगीता बागरेचा (संगी)*

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