दिल के एहसास......

*दिल का एहसास मन से...........*
*✍🏼संगी की कलम से*
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*रिश्ते अंकुरित होते हैं प्रेम से !*
       *जिंदा रहते हैं संवाद से !*
*महसूस होते हैं संवेदनाओं से !*
        *जिये जाते हैं दिल से !*
*मुरझा जाते हैं गलत फहमियों से !*
        *बिखर जाते हैं अंहकार से!*
         *" यही सत्य है।*

 रिश्ते केवल टूटते ही नहीं, टूटे हुए रिश्ते जुड़ते भी हैं।कोई मामूली गलती, गलत फहमियां या कुछ और।गलतफहमी के उसके वास्तविक कारण की तलाश की जाए।तो ना केवल बिगडते रिश्ते  संवरते हैं ।बल्कि कई रिश्ते  बिखरने से बच जाते हैं ।

संबंधों का मामला बहुत नाज़ुक होता है। बहुत मामूली सी बात भी किसी को ठेस पहुंचा सकती है। भले उसमें कुछ गलत न हो, पर संबंध टूटने का कारण बन सकती है।

 लेकिन, रिश्ते केवल टूटते ही नहीं, टूटे हुए रिश्ते जुड़ते भी हैं। इसके लिए चाहिए सिर्फ ईमानदार कोशिश और धैर्य।

रिश्तों का जुडना जितना मुश्किल होता है, उन्हें सहेजना उससे भी ज्यादा कठिन होता है।

इसके विपरीत तोडऩे के लिए एक झटका ही काफी है। यह झटका कुछ भी हो सकता है- कोई कड़वी बात, किसी मसले पर उपेक्षा, कोई मामूली गलती, गलत फहमियां या कुछ और।

मुश्किल यह है कि ऐसा जब भी होता है तो इसका पहले से कोई एहसास नहीं होता। पता ही तब चलता है, जब घटना घट चुकी होती है। अगर समय से पता चल जाए कि जो हम कहने या करने जा रहे हैं, वह हमारे संबंधों पर क्या असर डालेगा तो अधिकतर संबंध बिगड़ने ही न पाएं।

कई बार ऐसा भी होता है कि गलती के बाद तुरंत एहसास हो जाता है। ऐसी स्थिति में समझदार लोग बात को संभालने की कोशिश भी करते हैं। कई बार बात बन भी जाती है, लेकिन कई बार यह कोशिश बेकार साबित होती है।

 जहा *मैं* और *अहम* आ जाते ते है वहां सदा टकराव ही होता हैं ।

ये हमारा छोटा सा जीवन उसमें किसी भी क्षेत्र परिवेश में संबध चाहे पारिवारिक, सामाजिक ,आर्थिक,धार्मिक या व्यापारिक हो कोशिश करें कभी ना बिगड़े और अगर ऐसा हो भी जाए तो सुधारने और हालातों को ठिक करने का प्रयत्न जरूर करें ।
*मतभेद होते है मनभेद नही होना चाहिए।*

रहिमनजी ने कहा भी है ...........

रहिमन धागा प्रेम का,मत तोड़ो छिटकाय ।
टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ  पड़ जाय।

*🌹संगीता बागरेचा(संगी)🌹*

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