आत्ममंथन
*||श्री नाकोडाजी||*
*आत्ममंथन*
*जीवन की नई सोच.....*
*जीवन की नई दिशा.....*
*✍ संगी की कलम से........*
*शक्ति-साधना के पर्व में विकृतियों हेतू जिम्मेदार कौन ❓*
*🌀नवरात्रि शक्ति आराधना साधना का पर्व ...........इसे भक्ति शक्ति औऱ आराधना का पर्व ही रहने दे दिखावे,आडम्बर और व्याभिचार का बनता गर्त....... ना बनने दे.........*
*🌀पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के अंधानुकरण के* *चलते .....भारतीय सभ्यता और संस्कृति का होता ह्रास............*
*🌀नवरात्रि पर्व दिनो में चलते गरबा के दरम्यान युवा पीढ़ी द्वारा बैकलेस वस्त्र परिधान धारण कर अंगप्रदर्शन करना कहाँ तक सही हैं ........*
*🌀इस तरह के सवालों को लेकर सोशियल मिडिया पर कई आर्टिकल की भरमार लगी हुई हे.....*
सवाल उठता है इसका जिम्मेदार कौन है❓
🌀क्योंकि नवरात्रि में गरबा के आयोजक भी हम ,
नवरात्रि में गरबा खेलने वाले भी हम
और हमारे घर परिवार की युवा पीढी क्या पहन रही है ये सब भी हमारी हाजरी में हो रहा है तो .......
*🌀अकेली युवापीढ़ी कहाँ से जिम्मेदार हुई..*
*🌀इस सब के पीछे हम जिम्मेदार हैं जब बचपन में हम बडी खुशी से अपने बच्चों के लिए छोटे छोटे shorts, bustier लाकर खुशी खुशी पहनाते है वही से हम अंग प्रदर्शन की शुरुआत करते हैं ।*
*🌀अरे! नही हमारे कपड़े भी तो छोटे हो गए हैं फिर हमे किसी पर टिका टिप्पणी करने का अधिकार किसने दिया हैं।*
🌀और जब हम रोकने टोकने पर आते है तब हमारी युवा पीढी के तर्क तो सुनिए...आपके गाँवों मे आज भी बेकलेस ही कपडे (ब्लाऊज, बंडी ,कुर्ती काचली) पहनते है और इसमे बुरा क्या है ?
*🌀यहाँ में यह कहना चाहूगी कि तब में और अब में फर्क है।कुछ विशेष लोगो की ही ये वेश भूषा रही हैं और आज भी हैं वह ट्रेडिशन है साथ ही आज भी ऐसे कपड़े पहनी महिला को देखकर विकार उत्पन्न नही होते।*
*🌀लेकिन आज के दौर मे अलग बात हैं पर्व के नाम पर सजने संवरने में भोंडापन,अश्लीलता परोसी जा रही हैं ।
*🌀लेकिन आप क्या कर रहे है आधुनिकता की अंधी दौड़ मे सार्वजनिक स्थलों पर ग्लेमरस दिखने के चक्कर में नित नये हथकंडे अपनाकर बैकलेस टेटू प्रथा से फैशन परेड कर रहे है|*
*🌀आपको कुछ बोला जाय तो आपका जवाब होता है हमें हमारी मर्यादा का पता हैं। जिहाँ आपको आपकी मर्यादा का तो पता है इसलिए ही बाद के परिणाम गर्भपात के रूप में आते है।*
*🌀ये तो बाद की बात पर आपको इस तरह देख कर जो दूसरों के मन में वासना के गुबार उठते है उसके परिणाम कही बार नन्ही बालिकाओं को चाॅकलेट के लालच में बहला फुसला कर रेप के रूप में भी सामने आते है*
*🌀हम किसी के सामने पिरसी पिरसाई थाली का भोजन बनकर जायेगे तो कोइ भी भूखा भेड़िया उस भोजन को खाना चाहेगा*
*🌀"संगी'* के शब्द शायद सभी को कटार की भाँति चुभेंगे लेकिन ये ही सत्य है और कड़वा भी और इसे स्वीकार ने की हिम्मत ना हममें है ओर ना होगी.......
🌀 *अगर हमें अपनी सभ्यता संस्कृति को बचाना है तो शुद्वता सात्विकता और संस्कारों की बली न चढ़ने दे वरना विवाहेत्तर संबधो, अनचाहे गर्भपात ओर रेप की बिसात पर बैठ कर डुगडुगी बजाते रहिये*
*🌀आत्ममंथन* के लिए आपके पास आज भी समय है दुर्घटना से देर भली आप संस्कार ऐसे दीजिये की नवरात्रि का ये पावन पर्व हमारे लिए हमारे बच्चों के लिए खुशियों का पैगाम लाये
🌀नवरात्रि के शुभ पावन पर्व मे शुद्धता और साधना का महत्व बनाएँ रखें
*🌀विशेष नोट-जिन्हें इन परिस्थितियों का भान है वो तो अब अपनी अपनी सुरक्षा और भावनाओं को लेकर गम्भीर हो चुकें है और नवरात्रि के आयोजन ज्यादा से ज्यादा अपनी अपनी सोसायटी में करने के आग्रही भी बन रहे हैं ।
🌀 *आपकी टिप्पणी अपेक्षित है......*
📜📜📜📜📜📜📜📜📜 *सम्पादिका*
✒ *संगीता बागरेचा【संगी】*
भायंदर- मुम्बई / सादड़ी (राज.)
*✍🏼 आपसे नम्र निवेदन है ज्ञान की पोस्ट में कोई फेरबदल ना करें।*
💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀
*आत्ममंथन*
*जीवन की नई सोच.....*
*जीवन की नई दिशा.....*
*✍ संगी की कलम से........*
*शक्ति-साधना के पर्व में विकृतियों हेतू जिम्मेदार कौन ❓*
*🌀नवरात्रि शक्ति आराधना साधना का पर्व ...........इसे भक्ति शक्ति औऱ आराधना का पर्व ही रहने दे दिखावे,आडम्बर और व्याभिचार का बनता गर्त....... ना बनने दे.........*
*🌀पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के अंधानुकरण के* *चलते .....भारतीय सभ्यता और संस्कृति का होता ह्रास............*
*🌀नवरात्रि पर्व दिनो में चलते गरबा के दरम्यान युवा पीढ़ी द्वारा बैकलेस वस्त्र परिधान धारण कर अंगप्रदर्शन करना कहाँ तक सही हैं ........*
*🌀इस तरह के सवालों को लेकर सोशियल मिडिया पर कई आर्टिकल की भरमार लगी हुई हे.....*
सवाल उठता है इसका जिम्मेदार कौन है❓
🌀क्योंकि नवरात्रि में गरबा के आयोजक भी हम ,
नवरात्रि में गरबा खेलने वाले भी हम
और हमारे घर परिवार की युवा पीढी क्या पहन रही है ये सब भी हमारी हाजरी में हो रहा है तो .......
*🌀अकेली युवापीढ़ी कहाँ से जिम्मेदार हुई..*
*🌀इस सब के पीछे हम जिम्मेदार हैं जब बचपन में हम बडी खुशी से अपने बच्चों के लिए छोटे छोटे shorts, bustier लाकर खुशी खुशी पहनाते है वही से हम अंग प्रदर्शन की शुरुआत करते हैं ।*
*🌀अरे! नही हमारे कपड़े भी तो छोटे हो गए हैं फिर हमे किसी पर टिका टिप्पणी करने का अधिकार किसने दिया हैं।*
🌀और जब हम रोकने टोकने पर आते है तब हमारी युवा पीढी के तर्क तो सुनिए...आपके गाँवों मे आज भी बेकलेस ही कपडे (ब्लाऊज, बंडी ,कुर्ती काचली) पहनते है और इसमे बुरा क्या है ?
*🌀यहाँ में यह कहना चाहूगी कि तब में और अब में फर्क है।कुछ विशेष लोगो की ही ये वेश भूषा रही हैं और आज भी हैं वह ट्रेडिशन है साथ ही आज भी ऐसे कपड़े पहनी महिला को देखकर विकार उत्पन्न नही होते।*
*🌀लेकिन आज के दौर मे अलग बात हैं पर्व के नाम पर सजने संवरने में भोंडापन,अश्लीलता परोसी जा रही हैं ।
*🌀लेकिन आप क्या कर रहे है आधुनिकता की अंधी दौड़ मे सार्वजनिक स्थलों पर ग्लेमरस दिखने के चक्कर में नित नये हथकंडे अपनाकर बैकलेस टेटू प्रथा से फैशन परेड कर रहे है|*
*🌀आपको कुछ बोला जाय तो आपका जवाब होता है हमें हमारी मर्यादा का पता हैं। जिहाँ आपको आपकी मर्यादा का तो पता है इसलिए ही बाद के परिणाम गर्भपात के रूप में आते है।*
*🌀ये तो बाद की बात पर आपको इस तरह देख कर जो दूसरों के मन में वासना के गुबार उठते है उसके परिणाम कही बार नन्ही बालिकाओं को चाॅकलेट के लालच में बहला फुसला कर रेप के रूप में भी सामने आते है*
*🌀हम किसी के सामने पिरसी पिरसाई थाली का भोजन बनकर जायेगे तो कोइ भी भूखा भेड़िया उस भोजन को खाना चाहेगा*
*🌀"संगी'* के शब्द शायद सभी को कटार की भाँति चुभेंगे लेकिन ये ही सत्य है और कड़वा भी और इसे स्वीकार ने की हिम्मत ना हममें है ओर ना होगी.......
🌀 *अगर हमें अपनी सभ्यता संस्कृति को बचाना है तो शुद्वता सात्विकता और संस्कारों की बली न चढ़ने दे वरना विवाहेत्तर संबधो, अनचाहे गर्भपात ओर रेप की बिसात पर बैठ कर डुगडुगी बजाते रहिये*
*🌀आत्ममंथन* के लिए आपके पास आज भी समय है दुर्घटना से देर भली आप संस्कार ऐसे दीजिये की नवरात्रि का ये पावन पर्व हमारे लिए हमारे बच्चों के लिए खुशियों का पैगाम लाये
🌀नवरात्रि के शुभ पावन पर्व मे शुद्धता और साधना का महत्व बनाएँ रखें
*🌀विशेष नोट-जिन्हें इन परिस्थितियों का भान है वो तो अब अपनी अपनी सुरक्षा और भावनाओं को लेकर गम्भीर हो चुकें है और नवरात्रि के आयोजन ज्यादा से ज्यादा अपनी अपनी सोसायटी में करने के आग्रही भी बन रहे हैं ।
🌀 *आपकी टिप्पणी अपेक्षित है......*
📜📜📜📜📜📜📜📜📜 *सम्पादिका*
✒ *संगीता बागरेचा【संगी】*
भायंदर- मुम्बई / सादड़ी (राज.)
*✍🏼 आपसे नम्र निवेदन है ज्ञान की पोस्ट में कोई फेरबदल ना करें।*
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