माँ भक्ति हैं पिता शक्ति हैं

*||श्री नाकोडाजी||*

      *आत्ममंथन*

*जीवन की नई सोच.....*
       *जीवन की नई दिशा.....*

*✍ संगी की कलम से....*

*Dedicated to all father's*

*माँ मूरत हैं पिता मंदिर हैं*
*माँ भक्ति हैं पिता शक्ति हैं*

*▪दोस्तो आज दिन तक जब भी सभ्यता संस्कृति पर लिखा गया तब तब किस्से कहानियों कविताओं में *माँ की ममता ,पीड़ा त्याग, समर्पण का गान तो ज्यादातर हुआ है* पर मुझे लगता है *कही ना कही पिता के संघर्ष, स्नेह का आलेखन कम हुआ है आज भी कम हो रहा है*

*▪माता पिता संम्पूर्ण परिवार की नही अपितु समाज देश की संचित पूँजी, धरोहर के रक्षक सुसंस्कारो को पल्लवित करने की धूरी होते है ।*
कहते है ......

*माँ शब्दों की अभिव्यक्ति हैं*
 *पिता निशब्द आत्मशक्ति हैं*

*माँ खुशियों का आलिंगन हैं*
*पिता उन्हीं खुशियों का आलम्बन हैं*

*माँ नरमाई का मखमली लिहाफ़ हैं*
*पिता सख्ताई के स्नेह का खुरदरा गिलाफ है*

    जैसे
 *बिना पिता के माँ का अस्तित्व नहीं हैं*
*वैसे बिना पिता के बच्चों का व्यक्तित्व नही है*

*▪माँ का आँचल देता छाया हैं*
*तो पिता धूप में हमसाया हैं*

*▪माँ नन्हे परिंदो का आँगन हैं*
*तो पिता उनका आसमान है*

*माँ प्यार है स्नेह है शक्ति है*
*पिता संबल है प्रगति की अभिव्यक्ति हैं ।*

*▪माँ पालन पोषण और संस्कार हैं*
*पिता के अनुशासन में सपने साकार हैं ।*

*▪भले ही माँ देती मान मनुहार प्यार हैं,*
*पर बच्चों को पिता का रहता हरदम इंतजार हैं*

*▪कहते है माँ जब बच्चे  का जन्म देती है, तो नया जीवन पाती है।* *लेकिन लेबर रूम के बाहर बैचेनी से चहलकदमी करता एक पिता भी नया जीवन पाता है*

*पिता संग हैं तो संगी*त है*
*जीवन में हर पल जीत हैं*

*जीवन का आधार पिता हैं*
 *बच्चों का छायादार वृक्ष पिता है*

*पिता हो तो परिवार को राहत हैं*
*वरना मन हर पल आहत हैं*

*▪माँ बेशक भूखी रहकर बच्चों के लिए  भोजन की व्यवस्था करती है,*
*▪पिता उसी व्यवस्था को बनाए रखने दिन रात मशीन की तरह अपनी भूख की परवाह किए बगैर दौडता है।*

नन्हीं सी चोट पर *माँ रो रो* होती परेशान है
हिमालय सा *अटल पिता* भी होता हलकान हैं

सबने देखे हैं .....
*▪माँ के आँचल में चमकते आँसू*
किसी ने देखे हैं .....?
*▪पिता के तकिये के कोरों को भिगोते आँसू*

◼ *जब होती हैं बेटी की विदाई*
तब कितनों ने देखी.........
 *हँसते बाबुल की रुलाई*

*बाहर से जो दिखता अडिग अटल अन्दर से वो कोमल नर्म हैं*
*उसके दिल मे भी दफन कई अरमानो के मर्म हैं*

*जब उठता है पिता का साया*
*साथ छोड़ जाती है माया*
  *और*
*▪पिता के जाते ही कई सपनों की हो जाती अकाल मौत हैं*

*▪पिता है तो हर कोई साथ है*
*▪पिता नही तो बचपन अनाथ है*
*▪पिता एक उम्मीद और आस हैं*
*▪पिता बच्चों का साहस विश्वास हैं ।*

*अंततः*
कोई चाहे भी तो पिता की जगह नहीं ले सकता, लेकिन कुछ *माँ ऐं* कोशिश जरूर करती है और *अपना फर्ज* भी निभाती हैं .

माता पिता दोनो का साथ है वो इस *संसार में भाग्यवान* हैं ।

मात-पिता की सेवा ही परम् शांति और सुख का प्रतीक हैं।
 इस धरती पर साक्षात *भगवान* रूपी  अपने *माता-पिता* का उचित *मान- सम्मान* आदर जरूर करें .।🙏🙏

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📜📜📜📜📜📜📜📜📜      *सम्पादिका*
 ✒  *संगीता बागरेचा【संगी】*
   भायंदर- मुम्बई / सादड़ी (राज.)                               

*✍🏼 आपसे नम्र निवेदन है ज्ञान की पोस्ट में कोई फेरबदल ना करें।*
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