सामुहिक विवाह

*सामूहिक विवाह*

प्रकृति की सहकर रूक्षता
मेहनत और हिम्मत से
कच्छ वागड का भू जनेता
रण में हैं फूल खिलाता

तूफानों ओर भूकम्प में भी
अंगद सा अडिखम खड़ा रहता
उतार चढाव के साथ फिर से
गिरता पड़ता उठ खड़ा होता

धन्य है माँ भारती के ये लाल सुशोभित है ऐसे जैसे शोभे तिलक भाल
कच्छ के नर हैं जग की शोभा
सुकृत्यों के दम पर दमकते बन आभा

कच्छ के रण बाकुरों को मेरा प्रणाम
लोगों मे बन गए उम्मीद का प्रमाण
इनके साहस और जीवटता  को सलाम
दिया लाखों जीवों को आराम

सामूहिक विवाह का आयोजन,
समाज में जन जागृति लाता हैं ।
दान दहेज के अभिशाप से,
जन जन को मुक्ति दिलाता हैं

धन्य है श्री शांति जिन जैन जागृति ग्रुप,
जिसने ये बीड़ा उठाया हैं ।
कई लाड़ली लक्ष्मीओ को
दहेज के अभिशाप से बचाया हैं

सामूहिक विवाह का आयोजन
वर्तमान समय की माँग हैं ,
जागो प्यारो...........
शादी-ब्याह का ये समायोजन
आपके जीवन का पुण्यमय भाग हैं ।

सामूहिक विवाह आज की सच्चाई  हैं
जन जन मे जागृति आई है
बहुत सारी परेशानियों से मुक्ति दिलाई है
यह एक सामाजिक अच्छाई है

छोटे हो या बड़े अमीर हो या गरीब
सामुहिक विवाह करें करवायें

श्री शांति जैन जागृति ग्रुप की
पहल ने ,समाज मे जागृति हैं लायी
संगी ने इनके सम्मान में,शुभ कविता है गाई

*संगीता बागरेचा (संगी)*

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