*मकर संक्रांति पर्व*

*'तमसो मा ज्योतिर्गमय'*

*हे सूर्य! हमें भी अंधकार से प्रकाश की ओर ले चलो...*

🌸हिंदू धर्म ने माह को दो भागों में बाँटा है- कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष। इसी तरह वर्ष को भी दो भागों में बाँट रखा है। पहला उत्तरायण और दूसरा दक्षिणायन। उक्त दो अयन को मिलाकर एक वर्ष होता है। मकर संक्रांति के दिन सूर्य पृथ्वी की परिक्रमा करने की दिशा बदलते हुए थोड़ा उत्तर की ओर ढलता जाता है, इसलिए इस काल को उत्तरायण कहते हैं।

🌸सूर्य पर आधारित हिंदू धर्म में मकर संक्रांति का बहुत महत्व माना गया है। वेद और पुराणों में भी इस दिन का विशेष उल्लेख मिलता है। होली, दीपावली, दुर्गोत्सव, शिवरात्रि और अन्य कई त्योहार जहाँ विशेष कथा पर आधारित हैं, वहीं मकर संक्रांति खगोलीय घटना है, जिससे जड़ और चेतन की दशा और दिशा तय होती है। मकर संक्रांति का महत्व हिंदू धर्मावलंबियों के लिए वैसा ही है जैसे वृक्षों में पीपल, हाथियों में ऐरावत और पहाड़ों में हिमालय।

🌸जैनागम के अनुसार मकर संक्रांति के दिन चक्रवती को सूर्य  पर स्थित अकृत्रिम जिनालयों के भरत ऐरावत क्षेत्रों से दर्शन होते है जिसके कारण वह दान इत्यादि पुण्य प्रसन्नतापूर्वक करते है।अन्य मतों में भी इसी कारण सूर्य उपासना एवं दान का महत्व है।

🌸सूर्य के धनु से मकर राशि में प्रवेश को उत्तरायण माना जाता है। इस राशि परिवर्तन के समय को ही मकर संक्रांति कहते हैं। यही एकमात्र पर्व है जिसे समूचे भारत में मनाया जाता है, चाहे इसका नाम प्रत्येक प्रांत में अलग-अलग हो और इसे मनाने के तरीके भी भिन्न हों, किंतु यह बहुत ही महत्व का पर्व है।

🌸इसी दिन से हमारी धरती एक नए वर्ष में और सूर्य एक नई गति में प्रवेश करता है। वैसे वैज्ञानिक कहते हैं कि 21 मार्च को धरती सूर्य का एक चक्कर पूर्ण कर लेती है तो इस मान ने नववर्ष तभी मनाया जाना चाहिए। इसी 21 मार्च के आसपास ही विक्रम संवत का नववर्ष शुरू होता है और गुड़ी पड़वा मनाया जाता है, किंतु 14 जनवरी ऐसा दिन है, जबकि धरती पर अच्छे दिन की शुरुआत होती है। ऐसा इसलिए कि सूर्य दक्षिण के बजाय अब उत्तर को गमन करने लग जाता है। जब तक सूर्य पूर्व से दक्षिण की ओर गमन करता है तब तक उसकी किरणों का असर खराब माना गया है, लेकिन जब वह पूर्व से उत्तर की ओर गमन करते लगता है तब उसकी किरणें सेहत और शांति को बढ़ाती

🌸मकर संक्रांति पर पंतग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं  अपितु मनौवैज्ञानिक कारण जरूर हैं..
पौष मास की सर्दी के कारण हमारा शरीर कई बिमारियों से ग्रसित हो जाता है जिसका हमें  पता भी नही चलता इस मौसम मे त्वचा रूखी हो जाती है जब सूर्य उत्तरायण होता है तब इसकी किरणे हमारे शरीर के लिए औषधी का काम करती है और पंतग उडाते समय हमारा शरीर सीधे सूर्य  की किरणों के संपर्क  में आता है तो रोग स्वत:ही नष्ट हो जाते हैं
*अंततः -कारण चाहे कोई भी हो आपको सूर्य की किरणों  के संपर्क  मे आना है आइए धूप का मजा लेना है लिजिए त्यौहार मनाना है मनाइए पर... *पंतग* *उड़ाकर किसी के अंत का कारण ना बने हमारी थोडी सी देर की मजा किसी भी प्राणी मात्र की सजा का कारण ना बने इस बात का ध्यान रहे ।स्वयं  जिये और औरो को भी जीने दे।*
*जीने का अधिकार सबका साझा है क्या मनुष्य और क्या परिंदे ?*🙏🙏🙏🙏

*मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएँ*
             *🙏🌹संगी🌹🙏*
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

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