आखिर क्यों....?
*||श्री नाकोडाजी||*
*आत्ममंथन*
*जीवन की नई सोच.....*
*जीवन की नई दिशा.....*
*✍ संगी की कलम से.......*
*आज कुछ सवाल .....समाज से*
*स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक है फिर ये फर्क क्यो......❓*
*क्या पुरुष प्रधान समाज है इसलिए....❓*
*माना कि महिलाओं को अपरिचित व्यक्तियो के साथ उठना बैठना नही चाहिए*
*उनका क्या जो अपने होने का फायदा उठा जाते है❓*
*सगे सम्बन्धियो से दूरी का मापदंड क्या हो❓?*
*भाई और पिता को भी अविश्वास की नजरों से देखेंगे तो हर रिश्ते से विश्वास हट नही जाएगा❓*
*माना कि निर्जन स्थानो पर अकेले नही जाना चाहिए*
*किंतु घर मे बिराजित भेडियो का क्या❓*
*माना कि छोटे और अभद्र अश्लील विकार उत्पन्न करने वाले उत्तेजित वस्त्र परिधान नही पहनने चाहिए*
*क्या हम अपने घरों की बहू बेटियों को ऐसा करने से रोकते है❓*
*जहाँ तक मेरी जानकारी है कुछ अपवादों को छोड़कर बहू बेटियों की वेशभूषा मेरी भाषा मे साड़ी से सलवार कमीज फिर जीन्स से स्लैक्स और अब shorts ने ले ली है*
*यानि ज्यादा modern बनने के चक्कर मे नारी के आधे कपड़े स्वयं ही उतर चुके है। यहा दोषी कौन......❓*
*आज के so call मॉडर्न पिता भाई बंधु या ससुर सपरिवार बड़े ही शान के साथ अपनी ही बहु बेटियों के साथ pool party और शार्ट dresses में selfi लेते नजर आ जाते है ये कितना सही......❓*
*फिर अकेली नारी जाति को दोषी समझना कितना सही......?*.
*जो गाहे बगाहे स्त्री पुरष की समानता के ढोल पिटते नजर आते है*
*कितने उन्हें अपने बराबरी का दर्जा देते हैं❓*
*रिश्ते बदलते ही सोच के मायने भी बदल जाते है क्योँ❓*
*पिता ने बंदिशे लगाई,*
*उसे संस्कारो का नाम दे दिया I*
*सास ने कहा अपनी इच्छाओं को मार दो,*
*उसे परम्पराओं का नाम दे दिया* I
*ससुर ने घर को कैदखाना बना दिया,*
*उसे अनुशासन का नाम दे दिया* I
*पति ने थोप दिये अपने सपने अपनी इच्छायें,*
*उसे वफा का नाम दे दिया I*
*बच्चों ने अपने मनकी की और उसे नयी सोचका नाम दे दिया I*
*ठगी सी खड़ी वो जिन्दगी की राहों पर,*
*और उसने उसे किस्मत का नाम दे दिया I*
*मंदिर में गयी तो , महाराज ने उसे कर्म का नाम दे दिया I*
*विधवा हुई तो हर सपना खुशी का हर रंग छीन लिया❓*
*पुरुषों के समकक्ष खड़ी हुई तो स्वछंदता का नाम दे दिया*❓
*जिंदगी तो उसकी थी एक पल जीने को तरस गयी। फिर भी इन चलती सांसों को उसने जिंदगी का नाम दे दिया...*
*हमेशा से नारी को हेय दृष्टि से देखा गया क्यों❓*
*आखिर क्यों...........*❓
🌀 *आपकी टिप्पणी अपेक्षित है......*
📜📜📜📜📜📜📜📜📜 *सम्पादिका*
✒ *संगीता बागरेचा【संगी】*
भायंदर- मुम्बई / सादड़ी (राज.)
*✍🏼 आपसे नम्र निवेदन है ज्ञान की पोस्ट में कोई फेरबदल ना करें।*
💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀💱🌀
*आत्ममंथन*
*जीवन की नई सोच.....*
*जीवन की नई दिशा.....*
*✍ संगी की कलम से.......*
*आज कुछ सवाल .....समाज से*
*स्त्री और पुरुष एक दूसरे के पूरक है फिर ये फर्क क्यो......❓*
*क्या पुरुष प्रधान समाज है इसलिए....❓*
*माना कि महिलाओं को अपरिचित व्यक्तियो के साथ उठना बैठना नही चाहिए*
*उनका क्या जो अपने होने का फायदा उठा जाते है❓*
*सगे सम्बन्धियो से दूरी का मापदंड क्या हो❓?*
*भाई और पिता को भी अविश्वास की नजरों से देखेंगे तो हर रिश्ते से विश्वास हट नही जाएगा❓*
*माना कि निर्जन स्थानो पर अकेले नही जाना चाहिए*
*किंतु घर मे बिराजित भेडियो का क्या❓*
*माना कि छोटे और अभद्र अश्लील विकार उत्पन्न करने वाले उत्तेजित वस्त्र परिधान नही पहनने चाहिए*
*क्या हम अपने घरों की बहू बेटियों को ऐसा करने से रोकते है❓*
*जहाँ तक मेरी जानकारी है कुछ अपवादों को छोड़कर बहू बेटियों की वेशभूषा मेरी भाषा मे साड़ी से सलवार कमीज फिर जीन्स से स्लैक्स और अब shorts ने ले ली है*
*यानि ज्यादा modern बनने के चक्कर मे नारी के आधे कपड़े स्वयं ही उतर चुके है। यहा दोषी कौन......❓*
*आज के so call मॉडर्न पिता भाई बंधु या ससुर सपरिवार बड़े ही शान के साथ अपनी ही बहु बेटियों के साथ pool party और शार्ट dresses में selfi लेते नजर आ जाते है ये कितना सही......❓*
*फिर अकेली नारी जाति को दोषी समझना कितना सही......?*.
*जो गाहे बगाहे स्त्री पुरष की समानता के ढोल पिटते नजर आते है*
*कितने उन्हें अपने बराबरी का दर्जा देते हैं❓*
*रिश्ते बदलते ही सोच के मायने भी बदल जाते है क्योँ❓*
*पिता ने बंदिशे लगाई,*
*उसे संस्कारो का नाम दे दिया I*
*सास ने कहा अपनी इच्छाओं को मार दो,*
*उसे परम्पराओं का नाम दे दिया* I
*ससुर ने घर को कैदखाना बना दिया,*
*उसे अनुशासन का नाम दे दिया* I
*पति ने थोप दिये अपने सपने अपनी इच्छायें,*
*उसे वफा का नाम दे दिया I*
*बच्चों ने अपने मनकी की और उसे नयी सोचका नाम दे दिया I*
*ठगी सी खड़ी वो जिन्दगी की राहों पर,*
*और उसने उसे किस्मत का नाम दे दिया I*
*मंदिर में गयी तो , महाराज ने उसे कर्म का नाम दे दिया I*
*विधवा हुई तो हर सपना खुशी का हर रंग छीन लिया❓*
*पुरुषों के समकक्ष खड़ी हुई तो स्वछंदता का नाम दे दिया*❓
*जिंदगी तो उसकी थी एक पल जीने को तरस गयी। फिर भी इन चलती सांसों को उसने जिंदगी का नाम दे दिया...*
*हमेशा से नारी को हेय दृष्टि से देखा गया क्यों❓*
*आखिर क्यों...........*❓
🌀 *आपकी टिप्पणी अपेक्षित है......*
📜📜📜📜📜📜📜📜📜 *सम्पादिका*
✒ *संगीता बागरेचा【संगी】*
भायंदर- मुम्बई / सादड़ी (राज.)
*✍🏼 आपसे नम्र निवेदन है ज्ञान की पोस्ट में कोई फेरबदल ना करें।*
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