*|| श्री नाकोड़ाजी ||* *आदरणीय मनोज भाया कुसुम भाभीसा को परिणय जीवन की 34 वी सालगिरह पर अशेष शुभकामनाएं एवम बहुत बहुत बधाई* *ये जीवन जो बना रसमलाई है* *इस सफर की कड़वी सच्चाई है* *चले थे अजनबी जब साथ मिलकर* *आंधी तूफान कई आये थे चलकर* *लोगो के तानों से रूबरू कई बार हुए* *मेहनत से सफलता के चांद से दो चार हुए* *साथ है माँ भगवती और भैरूबाबा का* *घर आंगन बन गया खुशियों की आभा का* *कुसुम की महक से कुसुमित बन गए* *वीनू रिची दिनु के पगरण से बागबान बन गए* *जिस दिन नाकोड़ा दरबार बनाया* *भाव भक्ति का पुष्प नया खिलाया* *श्रद्धा समर्पण सेवा का बिगुल बजाया* *शासन सेवा कर धर्म ध्वज लहराया* *निज पर शासन फिर अनुशासन* *कड़क नियमो से अपना प्रशासन* *गुरु निश्रा में जप तप ध्यान योग* *साधना का संगीतमय अनुष्ठाशन* *उपलब्धियों के फूल यूँही नही,* *खिल गए जिंदगी के सफर मे* *साथ रहा कुसुम भाभीसा का* *जो चार चांद लगा दिए सफर में* *भाया भाभीसा मेरे सुनो ध्यान से* *सत्य और असत्य का,* *बोध पाया* *जीने का साहस जगाया* *निःस्वार्थ भाव भक्ति* *प्रेम और करुणा* *भा...
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श्यामप्रभु और पितरजी की दिव्य कृपादृष्टि, बरसने से बंसल परिवार की महकी वंशसृष्टि. तन बना मयूर,मन बना संगीत, सुर और ताल के संग गाये गीत. फलक से एक सितारा उतरा मेरे घर आँगन, नन्हे बाल गोपाल के आने से हुआ मन पावन. चंदन की खुश्बू और रेशम का हार, सावन की सुगंध और बारिश की फुहार. सपना ये सच हुआ जीवन को मिला आधार, दक्ष लाला का जन्म लाया खुशियां अपार. प्रियवर आपके आने से समारोह में लगे चार चाँद, भविष्य हो उज्ज्वल ऐसा देना स्नेहमय आशीर्वाद. आभार आप सभी का आप आये बहार आई, संग बधाई हर्षोल्लास की उमंग तरंग लाई. सदा रहे स्नेहीजन नेह बंधन आपका. सह आभार समस्त गुप्ता एवम चौमाल परिवार लेखिका-संगीता बागरेचा (संगी)