श्यामप्रभु और पितरजी की दिव्य कृपादृष्टि,
बरसने से बंसल परिवार की महकी वंशसृष्टि.

तन बना मयूर,मन बना संगीत,
सुर और ताल के संग गाये गीत.

फलक से एक सितारा उतरा मेरे घर आँगन,
नन्हे बाल गोपाल के आने से हुआ मन पावन.

चंदन की खुश्बू और रेशम का हार,
सावन की सुगंध और बारिश की फुहार.

सपना ये सच हुआ जीवन को मिला आधार,
दक्ष लाला का जन्म लाया खुशियां अपार.

प्रियवर आपके आने से समारोह में लगे चार चाँद,
भविष्य हो उज्ज्वल ऐसा देना स्नेहमय आशीर्वाद.

आभार आप सभी का आप आये बहार आई,
संग बधाई हर्षोल्लास की उमंग तरंग लाई.

सदा रहे स्नेहीजन नेह बंधन आपका.

सह आभार
समस्त गुप्ता एवम चौमाल परिवार

लेखिका-संगीता बागरेचा (संगी)

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