मैं किससे दोस्ती करूँ

*|| श्री नाकोड़ाजी ||* *सूरज में आग है* *चंदा में दाग है* *तारों में विराग है* , *मैं किससे दोस्ती करूँ* *ग्रीष्म में तपन है,* *शीत में कम्पन है* *वर्षा में अनबन है,* *मैं किससे दोस्ती करूँ।* *पवन में आक्रोश है,* *वन प्रान्त मदहोश है* *बादलों में जोश है,* *मैं किससे दोस्ती करूँ।* *संसार में भोग है,* *काया में रोग है* *स्वार्थी सब लोग हैं* *मैं किससे दोस्ती करूँ* *अब तो यही निष्कर्ष निकाला है* *आत्मा ही शरण है* *मोह माया मरण है*। *निज स्वरूप अपना है* *बाकि सब सपना है* *आतम ही परम हैं* *करुणा ही धरम है* *स्व ही अर्हम है* *शास्त्रों का मरम(मर्म) हैं* *संगी क्यों ना स्व से स्व की दोस्ती करूँ* 🌹 *संगीता बागरेचा (संगी)*🌹

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