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मैं हु समाज सेवक........

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 *😎बड़ा नाम चाहिए .....* *साहेब मैं हूँ समाज सेवक पर..* *मुझे नाम बड़ा चाहिए* *कुछ करूँ या ना करूँ पर..* *पेपर में रूतबा खास चाहिए* *कारनामे हें बड़े काले करूँ पर..* *सोशल मिडिया में फोटो अपटुडेट चाहिए* *बोलने का सलीका नहीं रखूँ पर..* *Whats up पर Status शानदार चाहिए* *घर में है माँ-बाप बदहवाल पर..* *मात-पितृ वंदना पर खिताब चाहिए* *प्यासे को पानी मे ना पिलाऊ पर..* *हाथों में जाम हर शाम चाहिए* *बेटे बेटी को संस्कार ना दू पर..* *बहु सुगुणी होनहार चाहिए* *नजर है हर फूल पर, पर..* *मसलने को कली हर रात चाहिए* *बीवी हो घर में गाय जैसी पर* *पहलू में लडकी लल्लनटाॅप चाहिए।* *मै समाज का भला ना करू पर* *समाज से मेरा भला हो ऐसा कारस्तान चाहिए।* *मै हूँ समाज सेवक पर....* *मुझे बड़ा नाम चाहिए.* *संगी कहती पते की एक बात पर...* *समाज से ऐसे सेवकों को करना बाहर चाहिए* *🙏🙏संगीता बागरेचा (संगी)🙏🙏*

ये जीवन है.........

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 *||श्री नाकोडा़जी||* मेरे *शब्द* ही मेरी *पहचान* है मेरा *अनुभव* ही विचारों का *आदान प्रदान* है जो कह दिया वह *भाव* थे ; जो नहीं कह सके वो *मौन* था ।। और, जो कहना है मगर ; कह नहीं सकते, वो *मर्यादा* है ।। *जिंदगी* का क्या है ? आ कर दो पल *शकुन* से बैठे भी नही , और चल दिए ।। रिश्तो की डोर *कच्ची* होती है..... कभी *धूप* तो कभी *छाँव* क्यों न हम, *सूरज* से; रिश्ते निभाना सीखें । रिश्तों को निभाने के लिए, कभी *अंधा*, कभी *गूँगा*, और कभी *बहरा* ; होना ही पड़ता है ।। *बरसात* गिरी और *कानों* में इतना कह गई कि....... *गर्मी* हमेशा किसी की भी नहीं रहती ।। *नसीहत*, *नर्म लहजे* में ही अच्छी लगती है । क्योंकि, *शब्दो का मकसद*, *सुलझाना* भी होता है; *उलझाना* नहीं । कहते हैं.... थमती नहीं, *जिंदगी* कभी, किसी के बिना । मगर, यह *गुजरती* भी नहीं, *अपनों के बिना* *संगी* य...

मैं किससे दोस्ती करूँ

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*|| श्री नाकोड़ाजी ||* *सूरज में आग है* *चंदा में दाग है* *तारों में विराग है* , *मैं किससे दोस्ती करूँ* *ग्रीष्म में तपन है,* *शीत में कम्पन है* *वर्षा में अनबन है,* *मैं किससे दोस्ती करूँ।* *पवन में आक्रोश है,* *वन प्रान्त मदहोश है* *बादलों में जोश है,* *मैं किससे दोस्ती करूँ।* *संसार में भोग है,* *काया में रोग है* *स्वार्थी सब लोग हैं* *मैं किससे दोस्ती करूँ* *अब तो यही निष्कर्ष निकाला है* *आत्मा ही शरण है* *मोह माया मरण है*। *निज स्वरूप अपना है* *बाकि सब सपना है* *आतम ही परम हैं* *करुणा ही धरम है* *स्व ही अर्हम है* *शास्त्रों का मरम(मर्म) हैं* *संगी क्यों ना स्व से स्व की दोस्ती करूँ* 🌹 *संगीता बागरेचा (संगी)*🌹
*|| श्री नाकोड़ाजी ||* *आदरणीय मनोज भाया  कुसुम भाभीसा को परिणय जीवन की 34 वी सालगिरह पर अशेष शुभकामनाएं एवम बहुत बहुत बधाई* *ये जीवन जो बना रसमलाई है* *इस सफर की कड़वी सच्चाई है* *चले थे अजनबी जब साथ मिलकर* *आंधी तूफान कई आये थे चलकर* *लोगो के तानों से रूबरू कई बार हुए* *मेहनत से सफलता के चांद से दो चार हुए* *साथ है माँ भगवती और भैरूबाबा का* *घर आंगन बन गया खुशियों की आभा का* *कुसुम की महक से कुसुमित बन गए* *वीनू रिची दिनु के पगरण से बागबान बन गए* *जिस दिन नाकोड़ा दरबार बनाया* *भाव भक्ति का पुष्प नया खिलाया* *श्रद्धा समर्पण सेवा का बिगुल बजाया* *शासन सेवा कर धर्म ध्वज लहराया* *निज पर शासन फिर अनुशासन* *कड़क नियमो से अपना प्रशासन* *गुरु निश्रा में जप तप ध्यान योग*  *साधना का संगीतमय अनुष्ठाशन* *उपलब्धियों के फूल यूँही नही,*  *खिल गए जिंदगी के सफर मे* *साथ रहा कुसुम भाभीसा का* *जो चार चांद लगा दिए सफर में* *भाया भाभीसा मेरे सुनो ध्यान से* *सत्य और असत्य का,* *बोध पाया* *जीने का साहस जगाया* *निःस्वार्थ भाव भक्ति* *प्रेम और करुणा* *भा...
श्यामप्रभु और पितरजी की दिव्य कृपादृष्टि, बरसने से बंसल परिवार की महकी वंशसृष्टि. तन बना मयूर,मन बना संगीत, सुर और ताल के संग गाये गीत. फलक से एक सितारा उतरा मेरे घर आँगन, नन्हे बाल गोपाल के आने से हुआ मन पावन. चंदन की खुश्बू और रेशम का हार, सावन की सुगंध और बारिश की फुहार. सपना ये सच हुआ जीवन को मिला आधार, दक्ष लाला का जन्म लाया खुशियां अपार. प्रियवर आपके आने से समारोह में लगे चार चाँद, भविष्य हो उज्ज्वल ऐसा देना स्नेहमय आशीर्वाद. आभार आप सभी का आप आये बहार आई, संग बधाई हर्षोल्लास की उमंग तरंग लाई. सदा रहे स्नेहीजन नेह बंधन आपका. सह आभार समस्त गुप्ता एवम चौमाल परिवार लेखिका-संगीता बागरेचा (संगी)

आशा का दीप

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http://dynamics🙏🌹 *आशा का दीप*🌹🙏 राह ऐसी प्यारी निष्कंटक बना दो आशा का दीप कोई नया जला दो। सबके दिलों में प्यार बसा दो नफरतों का नामो-निशां मिटा दो। दिल ना किसी का दुखा दो ना ही किसी को दर्दे सजा दो। मदद के हाथ तो बढ़ा दो प्रेम और आदर सदा दो। द्वैष के विष को दिल से मिटा दो आत्मकमल को कुंदन बना दो। मन की कलियाँ तुम खिला दो जीवन पथ को नयी दिशा दो। स्व को ज्योति पुंज बना दो जीवन मे सबके ज्योति फैला दो। *संगी मै* को तज स्व को *हम* बना दो आशा का दीप कोई नया जला दो। संगीत बागरेचा (संगी)
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*🎻प्रित रा रंग हजार🎻* *प्रकाशन- मुंबई राजस्थान* *🙏धन्यवाद आभार ललितजी शक्ति भाईसा* रंगे रंगो थे रंग हजार प्रित रा रंग घणेरा आयो रंगीलो त्योहार रंगे रंगो थे रंग हजार रंगे रंगो थे नवकार पंच परमेष्ठि  ने नमस्कार जपी जपी जीतो थे भवसार नमो अरिहंताणं श्वेतागार श्वेत है शांति आपनार नमो सिद्धाणं लालम लाल अनंत सिद्धया लाल दुलार नमो आयरियाणं पिलोपलार अरपे प्रकाश ज्ञानाकार नमो उवज्झायाणं हरा हरार सुख समृद्धि दातार नमोलोए सव्वसाहूणं नीलाकार बणसो थे शीतलाकार रंगे रंगो थे रंग हजार रंगे रंगो थे प्रकृतिकार लाली लाल प्रभाकार ऊर्जामय लाल लहराकार श्वेत सलूणो चन्द्राकार पवित्रता करे साकार अम्बर मारो नीलाकार  शुद्ध शीतल चन्दनाकार पीलो पीले तिमिराधंकार हरो भरो धरती रो सिणगार रंगे रंगो थे रंग हजार रंगे ना रंगो थे कालो कुथलाचार मोह माया थकी आवे शिथलाचार बंद करो थे पापाचार रोको थे हिंसाचार नहीं करो थे अंहकार नहीतर अजु वधसे भ्रष्टाचार ऐडा लोगो रो करो थे बहिष्कार नी होवे जीवण में सदाचार तो थोरो जीवणो है बेकार ना रंगे रंगो थे कालो कुथलाचार रंगे रंगो थे प...