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Showing posts from August, 2018

ढोल नगाडे .........

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🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳🇮🇳 *ढोल नगाडे तासे बजते, बजते चंग चौबारे* *गली गली झंडे फहराते खुशीयों से नाचें सारे* *लौट गये अंग्रेज पर जाते जाते*  *बंटवारे का खंजर भौक गये* *भाई हमारा हुआ पड़ोसी, रिसता है* *रिश्तों से खून, ऐसा नासूर छोड़ गये* *कर्म से तुमने उन्हें जातिवाद के*  *नाम पर व्यवस्था का नाम दिया* *हिन्दू,मुस्लिम,सिक्ख,ईसाई* *फिर धर्म आरक्षण के नाम पर बाँट दिया* *बैठकर अपने मुल्क से भारत में* *गुलामी का नया चरखा चला दिया*  *दंगे और आतंकवाद नहीं चले* *तो लव जेहाद में फांस लिया* *दसको तक लड़कर आजादी का* *छलकता खुशियों का जाम पिया* *इस आजादी को भुनानें मानसिक गुलामों* *ने माॅर्डन संस्कृति का नाम दिया* *भटके मानव महेरामण में लहराते हैं* *एक दिन का देश प्रेम जगाते है* *पर्व स्वतंत्रता दिवस का मनाते है* *फिर ढाक के तीन पात हो जाते है* *अब ना सुधरें तो कब सुधरोंगे* *आने वाली पीढ़ी को धरोहर में* *सभ्यता और संस्कृति के नाम पर* *कौनसी थाती,धरोहर दे जाओंगे* *समय बड़ा बलवान है*  *किस बात का अभिमान हैं* *संगी* *कहे स...

हमारा धर्म करूणा प्रधान..

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*|| श्री नाकोड़ाजी ||*      *🙏हमारा धर्म🙏*    *🙏करूणा प्रधान🙏*   *✍.........................संगी* ♻  *धर्म का मूल ही – दया या करुणाहै*  ♻ *हमारे ही नहीं  सभी धर्मों का मूल ही करूणा है।*  ♻दया भाव से ही मनुष्य का मन द्रवित होता है।किसी दुखी को देखकर उसका दुख दूर करने की कोशिश करना ही धर्म हैं । वास्तव में करुणा ईश्वरीय गुण हैं ।   ♻करुणा से महानता की और – संसार में जितने भी महान इन्सान हुए हैं, सबके जीवन में करूणा का अंग अवश्य रहा है । ♻करूणा निस्वार्थ होती है – करुणा सात्विक भाव है । करूणा न तो अपने-पराए का भेदभाव देखती है, और न ही अपनी हानि की परवाह करती है । करूणा में अदभुत प्रेरणा होती है ।दयावान किसी को कष्ट में देखकर चुपचाप नहीं बैठ सकता ।उनकी आत्मा उसे मज़बूर करती है कि दयावान दया करने से पहले अपना हानि-लाभ निश्चित करे । यहाँ तक कि वह किसी के प्राण बचाकर भी उसके बदले उससे कुछ नहीं चाहता । करूणा निस्वार्थ ही होती है ।    ♻ *भगवान महावीर कहते हैं-'दया धम्मस्य जणणी'।* अर्थात  दया या करू...

दोस्ती

*|| श्री नाकोड़ाजी ||* *🌹दोस्ती🌹* सुदामा,कृष्ण में श्रीराम, सुग्रीव में नहीं किसी रिश्ते में नहीं वो खुन में नही परिवार में नहीं छल में नही स्वार्थ में नहीं जलन में  है अपनेपन में सूरज की किरणों में चंदा की चाँदनी में बरसात की बूँदों में  सागर की लहरों में फूलों की खुशबू में भँवरों की गुंजन में कोयल की कूहू कूहू में पपिहे की पियु पियु में पायल की छम छम में साँसो की सरगम में ह्रदय की रूनझून में मिठी मनुहार में तिखी तकरार में सुखो की झार में  दुःखों की मार में शब्दों के हार में प्रभु के प्रित में *संगी* के गीत में जीवन के श्रृंगार में हर घडी,क्षण में हर एक बात में पल पल साथ में प्यारे दोस्त तुम्ही हो.............. मेरी ये कविता friendship  day (मैत्री दिवस)पर सभी कल्याणमित्रों को समर्पित है। *मैत्री का संबध सदा* *अंतर आलोकित दर्पण* *दोस्ती एक आईना है ।जो झूठ नहीं बोलता है।आपको आपके व्यक्तित्व से दोस्त ही परिचित करवाता हैं ।आपको सही गलत की परख कर पतन से उत्थान की तरफ ले जाता हैं ।आपके जीवन के अनमोल पल आपको दोस्तों से मिलते ...

संसार भूतों का डेरा

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*||श्री नाकोडाजी||* 👹 *भूतो का डेरा*👹 संसार ये भूतो का डेरा है, नहीं यहाँ कोई *भावनाओं* का मेला है। जलता है, जलाता है *जलन और ईर्ष्या* का झमेला है।           संसार ये.............. .  लूट है ठगी है *कामचोरों* का ठेला है।              संसार ये................ . काम है क्रोध है  *ढोंगियो* का तंबोला है।               संसार ये.................. तेरा मेरा करता प्राणी     यही उसका *तबेला* है।                संसार ये................ छिपा भेड़िया *समाज-सुधारक* के भेष में      सब जगह पोलम पोला है।                संसार ये................ बने ठेकेदार धर्म के *धर्मभीरू* देखा झोलम-झोला है।               संसार ये............... चेत संभलजा *प्राणी*     नहीं ये तेरा रैन बसेरा है।           ...