गणतंत्र दिवस आया
*🇮🇳🇮🇳जय हिंद🇮🇳🇮🇳* गणतंत्र दिवस आया, *खुशियां* लाया हैं मेरे वतन का *रूप निखर* आया हैं। रंग बिरंगे फूलों से *ऋतुराज* भी मुस्कराया हैं। धानी *आँचल माँ* भारती का खूब लहराया हैं सजा है सँवरा हैं *खुशियों* ने महकाया हैं इसकी रक्षा में *वीरों* ने अपना *रक्त* बहाया हैं। सियासत की देखो चाल, *नया चक्र* चलाया है देशद्रोहियों ने मिलकर *महागठबंधन* रचाया हैं। बाहर से नही खतरा *भीतर* ही मंडराया हैं। *दिमक* बन वतन को भीतर से खोखला बनाया हैं *लव जेहाद* हो या धर्म के नाम पर *लड़ाया* है अपना ही *अपनों* की अस्मत से *खेलने* आया हैं *विदेशी* कम्पनियों की जगमग ने लुभाया हैं । भारत को फिर से *मानसिक* गुलाम बनाने आया हैं हिन्द के *रणबांकुरों* इस गणतंत्र दिवस पर लो शपथ *बुद्धिचातुर्य* से लड़ने का समय आया हैं। *उखाड़* फेंको उन कुकरमुत्तों को जिसने आपकी जड़ों को कमजोर बनाने का मनसूबा बनाया हैं। वतन के सपूतो ने *नई उम्मीदों* को जगाया हैं। बहुत मुश्किल से *एकता* का दीपक जलाया हैं। मिटने ना देना *लाली माँ* भारती की खूनी होली खेल देश ने *बसंती* चोला पाया है मानो बात ...