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Showing posts from October, 2018

आत्ममंथन

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*||श्री नाकोडाजी||*       *आत्ममंथन* *जीवन की नई सोच.....*        *जीवन की नई दिशा.....* *✍ संगी की कलम से........* *शक्ति-साधना के पर्व में विकृतियों हेतू जिम्मेदार कौन ❓* *🌀नवरात्रि शक्ति आराधना साधना का पर्व ...........इसे भक्ति शक्ति औऱ आराधना का पर्व ही रहने दे दिखावे,आडम्बर और व्याभिचार का बनता गर्त....... ना बनने दे.........* *🌀पाश्चात्य सभ्यता और संस्कृति के अंधानुकरण के* *चलते .....भारतीय सभ्यता और संस्कृति का होता ह्रास............* *🌀नवरात्रि पर्व दिनो में चलते गरबा के दरम्यान युवा पीढ़ी द्वारा बैकलेस वस्त्र परिधान धारण कर अंगप्रदर्शन करना कहाँ तक सही हैं ........*  *🌀इस तरह  के सवालों को लेकर सोशियल मिडिया पर कई आर्टिकल की भरमार लगी हुई हे.....* सवाल उठता है इसका जिम्मेदार कौन है❓ 🌀क्योंकि नवरात्रि में गरबा के आयोजक भी हम , नवरात्रि में गरबा खेलने वाले भी हम और हमारे घर परिवार की युवा पीढी क्या पहन रही है ये सब भी हमारी हाजरी में हो रहा है तो ....... *🌀अकेली युवापीढ़ी कहाँ से जिम्मेदार हुई..* *🌀इस...

दिल के एहसास......

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*दिल का एहसास मन से...........* *✍🏼संगी की कलम से* . *रिश्ते अंकुरित होते हैं प्रेम से !*        *जिंदा रहते हैं संवाद से !* *महसूस होते हैं संवेदनाओं से !*         *जिये जाते हैं दिल से !* *मुरझा जाते हैं गलत फहमियों से !*         *बिखर जाते हैं अंहकार से!*          *" यही सत्य है।*  रिश्ते केवल टूटते ही नहीं, टूटे हुए रिश्ते जुड़ते भी हैं।कोई मामूली गलती, गलत फहमियां या कुछ और।गलतफहमी के उसके वास्तविक कारण की तलाश की जाए।तो ना केवल बिगडते रिश्ते  संवरते हैं ।बल्कि कई रिश्ते  बिखरने से बच जाते हैं । संबंधों का मामला बहुत नाज़ुक होता है। बहुत मामूली सी बात भी किसी को ठेस पहुंचा सकती है। भले उसमें कुछ गलत न हो, पर संबंध टूटने का कारण बन सकती है।  लेकिन, रिश्ते केवल टूटते ही नहीं, टूटे हुए रिश्ते जुड़ते भी हैं। इसके लिए चाहिए सिर्फ ईमानदार कोशिश और धैर्य। रिश्तों का जुडना जितना मुश्किल होता है, उन्हें सहेजना उससे भी ज्यादा कठिन होता है। इसके विपरीत तोडऩे के लिए एक...

आत्ममंथन जागो जैनों जागो

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*|| श्री नाकोड़ाजी||* *आत्ममंथन* *जोगो जैनो जागो* *समस्त जैन समाज ,साधु साध्वी, वृंद, सभी पंथ,गच्छ ,सभी सम्प्रदाय, श्वेतांबर ,दिगम्बर अचलगच्छ खतरगच्छ सभी से सामूहिक निवेदन...............* पालीताणा, गिरनार, सम्मेदशिखर गोरेगांव,भायंदर,फालना, तथा अन्य जगह समाज और साधु भगवंतो के बीच या साध्वीजी भगवंतो पर हमलों के बाबत ......... अति दुर्लभ जैन धर्म में जन्म मिलने और जैन धर्म में अगाध श्रद्धा के चलते बहुत ही कड़वी बात आहत मन से *संगी* की कलम से नम्र निवेदन करने जा रही है..... सर शर्म से झुक जाता है जब कोई ये कहता है कि मेरा पंथ सही कोई कहता है मेरा गच्छ सही....इस मै सही के चक्कर में  आप अपना नुकसान करते जा रहें हैं और औरो को मौका दे रहे है अपने जैन धर्म का अपमान करने का।और मौका दे रहे है कि ये बोलने का कि आपके धर्म और समाज में फूट है । सभी अपनी अपनी रोटियाँ सेकने में लगे हैं। अरे! हमारे पास समस्याओं की कमी हैं क्या जो हम चंद स्वार्थी मूढमति धर्म के ठेकेदारों के बहकावे में आ जाते हैं । आज सबको अपना नाम सोशल मिडिया में चाहिए इसलिए अपनी ढपली अपना राग के तर्ज पर चल रहे है...