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Showing posts from December, 2018

मौन एकादशी का महत्व आज के परिपेक्ष्य में.....😢

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*||श्री नाकोडाजी||*       *आत्ममंथन* *जीवन की नई सोच.....*        *जीवन की नई दिशा.....* *✍ संगी की कलम से....* *मौन एकादशी महत्व आज के परिप्रेक्ष्य में.................* 🌀 इस पृथ्वीतल पर 12 महिनों में  सर्वश्रेष्ठ दिन हैं। मगसर सुदी एकादशी का,जिसे हम मौन एकादशी के नाम से भी जानते हैं इस दिन तीर्थंकर परमात्मा के कुल 150 कल्याणक हुए हैं।और जो आत्मा विधिपूर्वक मगसर सुदी एकादशी की 11वर्ष तक आराधना करती हैं वह (आत्मा) अल्पकाल में मोक्षसुख प्राप्त  करती हैं । 🌀 आज के पवित्र दिन याने मार्गशीष महिने की एकादशी को 18 वें तीर्थकर परमात्मा अरनाथ भगवान ने राजपाट त्यागकर दीक्षा ग्रहण की थी। वहीं उन्नीसवें तीर्थकर मल्लीनाथ भगवान का जन्म, दीक्षा तथा केवलज्ञान यह तीनों कल्याणक इसी एकादशी के दिन हुए और 21वें तीर्थकर नमिनाथ प्रभू का केवलज्ञान कल्याणक भी इसी दिन सम्पन्न हुआ। इस प्रकार तीन तीर्थकर के पांच कल्याणक मार्गशीष शुक्ल एकादशी के कल्याणकारी दिन को पूर्ण हुए। इस प्रकार इस भरत क्षेत्र  के अतीत काल अर्थात कत उत्सर्पिणी के चौथे महाजश,छठ...
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*||श्री नाकोडाजी||*       *आत्ममंथन* *जीवन की नई सोच.....*        *जीवन की नई दिशा.....* *✍ संगी की कलम से....* *क्या हमारे मन मे रहे भाव(क्रोध  राग द्वेष)हमारी दुर्गति का कारण बन सकते है*⁉⁉ *भाव से भव* *भाव से भवभम्रणा* *भाव से गति* *भाव से भक्ति* *भाव से ही मुक्ति* हाँ , हमारे मन मे रहे भाव (क्रोध  रागव्दैष मान माया मोह )हमारी दुर्गति  का कारण बन सकते है 🌀बल्कि हम यू कह सकते है कि ये ही कारण है जिससे व्दारा जीव  की गति तय होती है 🌀या यू कहे कि मन के भावो से ही सदगति  या दुर्गति निश्चित  होतीहै । 🌀जैसे हमारे मन के भाव वैसे ही हमारे कर्म और वैसी ही गति 🌀शुभ औरअशुभ भाव है । मन मे दोनो भाव आ सकते है । 🌀यदि इस प्रकार के अशुभ भाव आये और आप ने बरोबर समय पे उसको रोका नही तो यह दुर्भाव आपको दुर्गति मे ले जा सकते है । 🌀मन के भाव मतलब मनोयोग । इसके लिए उत्तम उदाहरण दे सकते है ।प्रसन्नचन्द्र राजर्षि का या तान्दुल्य मत्स्य का और भी कही उदाहरण है हमारे शास्त्रों  मे 🌀किसी ने भावो के कारण मुक्ति...

बधाई

बेटियाँ  हमारा मान हैं । कुल गौरव की शान हैं । कन्यादान से बढ़ कर नहीं कोई महादान हैं । शादी एक अटूट बंधन हैं । दो दिलों का मिलन हैं । खुशियाँ भरा *रिद्धि,फेनिल* ये तो जन्मो का संबंध हैं । दो अजनबी जब, नयी शुरूआत करते *सौरभ* से *सुरभि* त हो, नया आशिया बनाते। मीठे मीठे सपने सजाते , *स्नेहल समीर* पुरवाई गाते अपनों के आशिष से नया घरौन्दा बसाते जैसे जेसल-तोरल के प्यार के फूल खिलें वैसे ही *तोरल-अक्षय* अमर प्रेम बन मिलें। *भक्ति* को भक्ति से *जिगर* मिला हैं खुशियों का लम्हा फूल बनकर खिला हैं । *नीशि* बन गयी हैं,  *मीत* के मन की मीत शादी के बंधन में बंध निभाएगी नयी रीत। सब रस्मो से बड़ी हैं जग में दिल से दिल की सगाई हैं *हेनल,कपिल* के मिलन की शुभा शुभ घड़ी आई हैं *मोनिका* के जीवन में,सदा *स्मित* रहें देख इनकी जोड़ी,देवता भी विस्मित रहें *नीरव* के जीवन में, *ख्याति* का प्रवेश हुआ प्यार के इस बंधन से,जीवन प्रफुल्लित हुआ। *बिंदी* तुम्हारी बिंदिया *वैभव* से चमकती रहें जीवन पथ पर बिंदीवैभव की गृहस्थी चमकती रहें । *लीम्पा* और *जितेन* सदा र...

सामुहिक विवाह

*सामूहिक विवाह* प्रकृति की सहकर रूक्षता मेहनत और हिम्मत से कच्छ वागड का भू जनेता रण में हैं फूल खिलाता तूफानों ओर भूकम्प में भी अंगद सा अडिखम खड़ा रहता उतार चढाव के साथ फिर से गिरता पड़ता उठ खड़ा होता धन्य है माँ भारती के ये लाल सुशोभित है ऐसे जैसे शोभे तिलक भाल कच्छ के नर हैं जग की शोभा सुकृत्यों के दम पर दमकते बन आभा कच्छ के रण बाकुरों को मेरा प्रणाम लोगों मे बन गए उम्मीद का प्रमाण इनके साहस और जीवटता  को सलाम दिया लाखों जीवों को आराम सामूहिक विवाह का आयोजन, समाज में जन जागृति लाता हैं । दान दहेज के अभिशाप से, जन जन को मुक्ति दिलाता हैं धन्य है श्री शांति जिन जैन जागृति ग्रुप, जिसने ये बीड़ा उठाया हैं । कई लाड़ली लक्ष्मीओ को दहेज के अभिशाप से बचाया हैं सामूहिक विवाह का आयोजन वर्तमान समय की माँग हैं , जागो प्यारो........... शादी-ब्याह का ये समायोजन आपके जीवन का पुण्यमय भाग हैं । सामूहिक विवाह आज की सच्चाई  हैं जन जन मे जागृति आई है बहुत सारी परेशानियों से मुक्ति दिलाई है यह एक सामाजिक अच्छाई है छोटे हो या बड़े अमीर हो या गरीब सामुहिक ...